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विश्व स्तनपान सप्ताह: जीवन की टिकाऊ शुरुआत के लिए स्तनपान, जानिए माँ और बच्चे के लिए संजीवनी लाभ

नवजात स्वास्थ्य को मजबूत करने और कार्यस्थल पर सहायता प्रणाली बढ़ाने पर विश्व स्वास्थ्य संगठन का जोर

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रांची: शिशु स्वास्थ्य, पोषण और विकास के सबसे प्रभावी व प्राकृतिक आधार को बढ़ावा देने के उद्देश्य से प्रतिवर्ष आयोजित होने वाला ‘विश्व स्तनपान सप्ताह’ (World Breastfeeding Week 2026) इस वर्ष 1 अगस्त से 7 अगस्त तक वैश्विक स्तर पर मनाया जा रहा है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), यूनिसेफ (UNICEF) और वर्ल्ड एलायंस फॉर ब्रेस्टफीडिंग एक्शन (WABA) के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित होने वाले इस वैश्विक अभियान का मुख्य उद्देश्य नवजात शिशुओं के लिए मां के दूध के महत्व के प्रति जागरूकता फैलाना तथा माताओं को सामाजिक व संस्थागत सहायता प्रदान करना है।

इस वर्ष विश्व स्तनपान सप्ताह 2026 की आधिकारिक थीम “जीवन की टिकाऊ शुरुआत के लिए स्तनपान: जो प्रभावी है उसे मजबूत करें” (Breastfeeding for a Sustainable Start in Life: Strengthen What Works) रखी गई है। यह थीम इस बात पर केंद्रित है कि माताओं और शिशुओं के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने वाले proven उपायों, जैसे-अस्पतालों में बेहतर देखभाल, कार्यस्थल पर मातृत्व सुविधाएं, और सामुदायिक समर्थन को और अधिक सुदृढ़ किया जाए ताकि आने वाली पीढ़ियों को जीवन की स्वस्थ और टिकाऊ शुरुआत मिल सके।

शिशु सुरक्षा का प्रथम कवच: ‘पहला पीला गाढ़ा दूध’ (कोलोस्ट्रम)

स्वास्थ्य विशेषज्ञों और बाल रोग विशेषज्ञों के अनुसार, जन्म के तुरंत बाद (प्रथम एक घंटे के भीतर) शिशु को मां का पहला गाढ़ा पीला दूध, जिसे कोलोस्ट्रम (Colostrum) कहा जाता है, पिलाना अत्यंत आवश्यक है। यह दूध शिशु के लिए प्राकृतिक टीके (First Vaccine) की तरह कार्य करता है। इसमें एंटीबॉडीज, प्रोटीन, और रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने वाले आवश्यक पोषक तत्व प्रचुर मात्रा में होते हैं, जो नवजात को संक्रमण, पीलिया और विभिन्न बीमारियों से बचाते हैं।

विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की गाइडलाइंस के अनुसार, शिशु के जन्म से लेकर शुरुआती 6 महीने तक केवल और केवल स्तनपान (Exclusive Breastfeeding) ही कराया जाना चाहिए। इस अवधि के दौरान बच्चे को पानी, ऊपर का दूध या अन्य किसी आहार की आवश्यकता नहीं होती, क्योंकि मां के दूध में 80% से अधिक पानी और सभी आवश्यक पोषक तत्व सही अनुपात में मौजूद होते हैं। 6 महीने के बाद उचित ऊपरी आहार के साथ-साथ 2 वर्ष या उससे अधिक समय तक स्तनपान जारी रखने की सलाह दी जाती है।

माँ और बच्चे दोनों के लिए दीर्घकालिक स्वास्थ्य लाभ

स्तनपान केवल बच्चे के विकास के लिए ही नहीं, बल्कि मां के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य के लिए भी वरदान साबित होता है:

  • शिशु के लिए लाभ: स्तनपान से शिशु का मानसिक व शारीरिक विकास तीव्र गति से होता है। इससे बच्चों में दस्त (Diarrhea), निमोनिया, कान के संक्रमण, अस्थामा, और भविष्य में होने वाले मोटापे व मधुमेह (Diabetes) का खतरा काफी हद तक कम हो जाता है।

  • मां के लिए लाभ: स्तनपान कराने वाली माताओं में प्रसव के बाद होने वाले रक्तस्राव (Postpartum Hemorrhage) का खतरा कम होता है। साथ ही, यह माताओं में स्तन कैंसर (Breast Cancer), अंडाशय (Ovarian) कैंसर, टाइप-2 डायबिटीज और प्रसवोत्तर अवसाद (Postpartum Depression) के जोखिम को उल्लेखनीय रूप से घटाता है।

सामाजिक और संस्थागत सहयोग की आवश्यकता: ‘वार्म चेन ऑफ सपोर्ट’

2026 की थीम के तहत वैश्विक निकायों ने इस बात पर विशेष बल दिया है कि स्तनपान कराना केवल एक मां की व्यक्तिगत जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि इसके लिए पूरे परिवार, समाज, स्वास्थ्य प्रणालियों और कार्यस्थलों का सहयोग अनिवार्य है।

  1. कार्यस्थल पर सुविधाएं (Workplace Support): कामकाजी माताओं के लिए पेड मैटरनिटी लीव (सवेतन मातृत्व अवकाश), दफ्तरों में ब्रेस्टफीडिंग/पंपिंग रूम और काम के दौरान ब्रेक की सुविधा मिलना अनिवार्य है। नीतिगत अध्ययनों के अनुसार, सवेतन मातृत्व अवकाश से शिशु के केवल स्तनपान की दर में 50% से अधिक की वृद्धि दर्ज की जाती है।

  2. अस्पतालों की भूमिका (Baby-Friendly Hospitals): प्रसूति गृहों और अस्पतालों में जन्म के तुरंत बाद मां और बच्चे को एक साथ (Skin-to-Skin Contact) रखना और प्रशिक्षित लैक्टेशन काउंसलर्स द्वारा माताओं का मार्गदर्शन करना जरूरी है।

  3. सॉलिड ब्रेस्ट-मिल्क सब्स्टीट्यूट कोड: डिब्बाबंद दूध या इन्फेंट फॉर्मूला के भ्रामक विज्ञापनों पर रोक लगाना और माताओं को सही वैज्ञानिक जानकारी देना समय की मांग है।

विश्व स्तर पर अभियान के दौरान पूरे सप्ताह स्वास्थ्य शिविरों, कार्यशालाओं, वेबिनार और सामुदायिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जाएगा ताकि स्तनपान से जुड़ी भ्रांतियों को दूर कर समाज में एक सहयोगी माहौल का निर्माण किया जा सके।

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