Ranchi: विश्व हृदय दिवस (वर्ल्ड हार्ट डे) के खास मौके पर रांची स्थित ‘भगवान महावीर मणिपाल हॉस्पिटल’ ने दिल से जुड़ी जटिल बीमारियों के इलाज में आई आधुनिक क्रांतियों और एडवांस्ड कार्डियेक तकनीकों पर विस्तार से बात की। अस्पताल के वरिष्ठ कार्डियेक स्पेशलिस्ट्स ने बताया कि कैसे आधुनिक मेडिकल साइंस की मदद से अब उन गंभीर मरीजों का इलाज भी मुमकिन हो रहा है, जिन्हें पारंपरिक तरीकों से ठीक कर पाना बेहद मुश्किल माना जाता था।
आजकल बदलती लाइफस्टाइल, उम्र, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर और किडनी की बीमारियों के चलते हृदय रोग पहले से कहीं अधिक जटिल हो चुके हैं। कुछ मरीजों में धमनियों की गंभीर ब्लॉकेज पाई जाती है, तो कुछ में वाल्व और स्ट्रक्चरल हार्ट से जुड़ी समस्याएं होती हैं। अस्पताल के कार्डियोलॉजी कंसल्टेंट डॉ. दीपक कुमार, डॉ. धनंजय कुमार, डॉ. रोहित कुमार और सीटीवीएस कंसल्टेंट डॉ. कुमार उज्ज्वल ने संयुक्त रूप से बताया कि अब कार्डियेक केयर में ‘सबके लिए एक जैसा इलाज’ वाला दौर पुराना हो चुका है। अब हर मरीज की उम्र, बीमारी की गंभीरता और सेहत की स्थिति को देखकर उनके लिए ‘पर्सनलाइज्ड’ (व्यक्तिगत) इलाज की योजना तैयार की जाती है।
एडवांस्ड तकनीकों ने बढ़ाई उम्मीद की किरण
मणिपाल हॉस्पिटल, रांची में अब कई ऐसी विश्वस्तरीय तकनीकें उपलब्ध हैं, जो बिना किसी बड़ी सर्जरी के मरीजों की जान बचा रही हैं। इनमें एम-टीयर (MitraClip), टावी (TAVI), टेवर (TAVR), कॉम्प्लेक्स CTO PCI, रोटब्लेटर, ओर्बिटल एथेरेक्टॉमी, जीरो-कॉन्ट्रास्ट और जीरो-मेटल PCI, लीडलेस पेसमेकर और कंडक्शन सिस्टम पेसिंग (CSP) जैसी बेहद उन्नत तकनीकें शामिल हैं।
अस्पताल ने बिहार और झारखंड क्षेत्र में पहली बार इंपेला-सपोर्टेड कार्डियेक इंटरवेंशन (Impella Support) की शुरुआत की है और पूर्वी भारत में सबसे अधिक इंपेला तकनीक का इस्तेमाल कर एक मिसाल कायम की है। यह उन मरीजों के लिए वरदान साबित हो रहा है, जिनका दिल बेहद कमजोर होता है और इंटरवेंशन के दौरान जिन्हें मैकेनिकल सपोर्ट की जरूरत पड़ती है।
बच्चों और वयस्कों के लिए ‘मासूम धड़कन’ पहल
अस्पताल केवल वयस्कों ही नहीं, बल्कि जन्मजात हृदय दोष (Congenital Heart Defect) से पीड़ित बच्चों और बड़ों के लिए ‘मासूम धड़कन’ नाम से डिवाइस-क्लोजर कार्यक्रम चला रहा है। इसके जरिए बिना किसी ओपन-हार्ट सर्जरी या बड़े चीर-फाड़ के, केवल डिवाइस आधारित प्रक्रिया से दिल के सुराख व दोष ठीक किए जा रहे हैं। कार्यक्रम के दौरान उन मरीजों ने भी अपने अनुभव साझा किए, जो हार्ट अटैक, हार्ट फेलियर, वाल्व की समस्या या रिदम की गड़बड़ी से उबरकर अब एक सामान्य और सेहतमंद जिंदगी जी रहे हैं।
अस्पताल का मुख्य उद्देश्य झारखंड और आसपास के इलाकों में कार्डियेक केयर का दायरा बढ़ाना है, ताकि किसी भी मरीज को बड़े इलाज के लिए दूसरे राज्यों का रुख न करना पड़े और उन्हें अपने घर के पास ही विश्वस्तरीय इलाज मिल सके।




