फॉण्ट कनवर्टर NEW

क्या ‘लक्ष्मण फल’ सोरसोप से बनेगी कैंसर की नई दवा? रिसर्च में खुला राज

Health News: जानलेवा बीमारी कैंसर के उपचार को लेकर वैज्ञानिक प्राकृतिक और वैकल्पिक विकल्पों पर रिसर्च कर रहे हैं। हाल ही में सोरसोप जिसे दक्षिण भारत में लक्ष्मण फल कहा जाता है, पर हुए एक अध्ययन ने नई उम्मीद जगाई है। सोरसोप एक उष्णकटिबंधीय पौधा

अपनी भाषा में पढ़ें

Health News: जानलेवा बीमारी कैंसर के उपचार को लेकर वैज्ञानिक प्राकृतिक और वैकल्पिक विकल्पों पर रिसर्च कर रहे हैं। हाल ही में सोरसोप जिसे दक्षिण भारत में लक्ष्मण फल कहा जाता है, पर हुए एक अध्ययन ने नई उम्मीद जगाई है। सोरसोप एक उष्णकटिबंधीय पौधा है जो अमेरिका और दक्षिण भारत के कुछ हिस्सों में उगाया जाता है।

इसका फल खट्टा-मीठा होता है और पत्तियों में टैनिन, फ्लेवोनोइड्स, एल्कलॉइड्स और सैपोनिन्स जैसे यौगिक पाए जाते हैं। ये एंटीऑक्सीडेंट की तरह काम करके शरीर को फ्री रेडिकल्स से बचाते हैं, जो कैंसर जैसी बीमारियों का बड़ा कारण होते हैं। अमेरिका में 2022 में हुई एक रिसर्च में वैज्ञानिकों ने सोरसोप की पत्तियों से निकले कवकों का विश्लेषण किया। इन कवकों से बने अर्क को गर्भाशय ग्रीवा (सर्वाइकल) कैंसर की कोशिकाओं पर परखा गया। नतीजों में पांच कवक प्रभावी पाए गए, जिनमें एसएआर-एसएम2 नामक एक कवक ने कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने में सबसे अधिक असर दिखाया। खास बात यह रही कि इसने सामान्य कोशिकाओं को नुकसान नहीं पहुंचाया।

डीएनए जांच में यह कवक पेनिसिलियम क्रस्टोसम प्रजाति का निकला। यह खोज बताती है कि भविष्य में इससे कैंसर-रोधी दवा बनाई जा सकती है। पहले हुए अध्ययनों से भी इस बात के संकेत मिले हैं। 2018 की एक समीक्षा में पाया गया कि ग्रेविओला (सोरसोप) के पत्ते, तना और फल में मौजूद असेटोजेनीन्स नामक यौगिक कैंसर कोशिकाओं को टारगेट कर उन्हें खत्म कर सकते हैं। यहां तक कि ये उन कोशिकाओं पर भी असर डालते हैं जो पारंपरिक दवाओं के प्रति प्रतिरोधक बन चुकी होती हैं। हालांकि, विशेषज्ञों का कहना है कि अब तक सोरसोप पर ज्यादातर रिसर्च प्रयोगशाला और पशु-स्तर तक ही सीमित रही है। इंसानों पर बड़े पैमाने पर क्लिनिकल ट्रायल नहीं हुए हैं। यही कारण है कि एफडीए ने सोरसोप को कैंसर के इलाज के तौर पर मान्यता नहीं दी है।

बिना चिकित्सकीय परामर्श इसे दवा की तरह लेना खतरनाक हो सकता है। सोरसोप को फल के रूप में खाना सुरक्षित और सेहतमंद माना जाता है। इसमें एंटीऑक्सीडेंट, जीवाणुरोधी और सूजन-रोधी गुण हैं, जो सामान्य स्वास्थ्य के लिए लाभकारी हैं। लेकिन इसे कैंसर की दवा मानने से पहले और शोध की जरूरत है। कैंसर मरीजों के लिए जरूरी है कि वे केवल डॉक्टर की सलाह पर ही किसी भी वैकल्पिक उपचार को अपनाएं। बता दें कि कैंसर दुनियाभर में मौत की बड़ी वजहों में से एक है। आधुनिक इलाज जैसे सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन और इम्यूनोथेरेपी से मरीजों की जिंदगी बचाई जाती है, लेकिन इनके गंभीर साइड इफेक्ट्स भी होते हैं।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram