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गंदगी से मुक्ति और कमाई भी: पश्चिम चंपारण के इस गांव ने पेश किया अनोखा मॉडल

पश्चिम चंपारण की डुमरी पंचायत ने 1700 क्विंटल जैविक खाद बेचकर खड़ा किया आत्मनिर्भर मॉडल; किसानों को सस्ती खाद के साथ गांव को मिली गंदगी से मुक्ति।

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Patna: लोहिया स्वच्छ बिहार अभियान (एसबीएम-जी) के तहत पश्चिम चंपारण जिले की डुमरी ग्राम पंचायत ने कचरा प्रबंधन और स्वावलंबन का एक अनूठा मॉडल पेश किया है। पंचायत ने वैज्ञानिक तरीके से कचरे का निस्तारण करते हुए अब तक करीब 1,700 क्विंटल जैविक खाद तैयार कर स्थानीय किसानों को उपलब्ध कराई है। इस पहल से न केवल गांव गंदगी-मुक्त हुआ है, बल्कि किसानों को बेहद कम दरों पर प्राकृतिक खाद भी मिलने लगी है।

खाद की बिक्री से हो रही पंचायत की अतिरिक्त आय

डोर-टू-डोर कचरा एकत्र कर बनाई गई इस जैविक खाद को किसानों को सस्ती दरों पर बेचा गया है। खाद की बिक्री से प्राप्त पूरी राशि को ग्राम पंचायत के ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन (SLWM) खाते में जमा किया जा रहा है। अब इसी फंड से पंचायत में कचरा उठाने वाले ठेला और ई-रिक्शा की मरम्मत के साथ-साथ अभियान से जुड़े स्वच्छता कर्मियों की विभिन्न आवश्यकताओं को पूरा किया जा रहा है।

3,430 परिवारों वाले गांव में ऐसे बदला पूरा सिस्टम

क्षमता वर्धन और आईईसी (IEC) के जिला सलाहकार शशि रंजन ने बताया कि प्रखंड मुख्यालय से करीब 5 किलोमीटर दूर स्थित 3,430 परिवारों वाली डुमरी पंचायत में पहले कचरा प्रबंधन बेहद चुनौतीपूर्ण था। घरों, दुकानों और चौराहों पर कचरा बिखरा रहता था, वहीं किसान खेती के लिए महंगे रासायनिक उर्वरकों पर निर्भर थे। वर्ष 2023 में पंचायत ने इस समस्या को अवसर में बदलने का फैसला किया और ठोस एवं तरल अपशिष्ट प्रबंधन योजना को मिशन मोड में लागू किया।

15 वार्डों में वैज्ञानिक कचरा निस्तारण नेटवर्क

गांव को स्वच्छ और आत्मनिर्भर बनाने के लिए पंचायत ने ठोस ढांचा तैयार किया:

  • डोर-टू-डोर कलेक्शन: पंचायत के सभी 15 वार्डों से दैनिक कचरा संग्रहण के लिए 15 ठेला रिक्शा और 1 बैटरी चालित ई-रिक्शा तैनात किए गए।

  • वेस्ट प्रोसेसिंग यूनिट (WPU): एकत्र किए गए गीले और सूखे कचरे को सीधे WPU में पहुंचाया जाता है, जहां वैज्ञानिक तकनीक से जैविक खाद तैयार होती है।

  • सस्ती दरें: डब्ल्यूपीयू में तैयार 1700 क्विंटल खाद किसानों को न्यूनतम मूल्य पर दी जा रही है।

किसानों की लागत घटी, जैविक खेती को नई दिशा

स्थानीय स्तर पर सस्ती जैविक खाद की उपलब्धता से किसानों की फसल उत्पादन लागत में उल्लेखनीय कमी आई है। रासायनिक उर्वरकों पर निर्भरता कम होने से मिट्टी की गुणवत्ता सुधरी है और पूरे इलाके में पर्यावरण अनुकूल जैविक खेती को तेजी से बढ़ावा मिल रहा है।

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