Health Desk: माइग्रेन से परेशान लोगों के लिए विटामिन D को लेकर एक अध्ययन में सकारात्मक संकेत सामने आए हैं। डेनमार्क की एल्बॉर्ग यूनिवर्सिटी के वैज्ञानिकों के अध्ययन में विटामिन D सप्लीमेंट लेने वाले माइग्रेन रोगियों में अटैक की आवृत्ति कम देखी गई। हालांकि, इसे माइग्रेन के स्थापित इलाज का विकल्प नहीं माना जाना चाहिए और सप्लीमेंट लेने से पहले चिकित्सकीय सलाह जरूरी है।
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माइग्रेन के अटैक में दिखी कमी
अध्ययन के दौरान माइग्रेन के मरीजों को छह महीने तक रोजाना विटामिन D की खुराक दी गई। अध्ययन के मुताबिक, जिन मरीजों को पहले महीने में करीब छह दिन माइग्रेन की समस्या होती थी, उनमें यह अवधि घटकर करीब तीन दिन रह गई। शोधकर्ताओं ने इस आधार पर संकेत दिया कि विटामिन D सप्लीमेंट कुछ लोगों में माइग्रेन के अटैक की आवृत्ति कम करने में मददगार हो सकता है।
विटामिन D और माइग्रेन का संबंध
इससे पहले हुए अध्ययनों में भी सामान्य लोगों की तुलना में माइग्रेन से पीड़ित लोगों में विटामिन D की कमी अधिक होने के संकेत मिले हैं। हालांकि, विटामिन D की कमी और माइग्रेन के बीच संबंध तथा सप्लीमेंट के प्रभाव को लेकर शोध जारी है। मूल रिपोर्ट में मस्तिष्क की रक्त वाहिकाओं में सूजन कम होने और रक्त प्रवाह बेहतर होने को संभावित कारण बताया गया है।
सूरज की रोशनी से मिलता है विटामिन D
सूरज की रोशनी शरीर में विटामिन D बनने का प्रमुख प्राकृतिक माध्यम है। इसके अलावा मछली, अंडे और कुछ खाद्य पदार्थों से भी इसकी मात्रा प्राप्त की जा सकती है। विटामिन D शरीर में कैल्शियम के अवशोषण और हड्डियों को स्वस्थ रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है।
सप्लीमेंट लेने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूरी
विटामिन D सप्लीमेंट आसानी से उपलब्ध हैं, लेकिन माइग्रेन होने पर अपनी मर्जी से अधिक मात्रा में इनका सेवन करना उचित नहीं है। शरीर में विटामिन D की जरूरत और सही खुराक व्यक्ति के अनुसार अलग हो सकती है। लगातार या गंभीर माइग्रेन होने पर चिकित्सक से जांच और उचित उपचार लेना जरूरी है।
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