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स्वच्छता ही सेवा अभियान: बिहार के 78 लाख से अधिक ग्रामीण घरों तक पहुंची अलख

बिहार में 'स्वच्छता ही सेवा 2026' के तहत 78.48 लाख ग्रामीण घरों तक जागरूकता अभियान पहुंचा। राज्य में 1 से 15 अक्टूबर तक स्वच्छता पखवाड़ा मनाने का निर्णय लिया गया है।

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Patna: बिहार के ग्रामीण अंचलों में स्वच्छता, सामुदायिक सहभागिता और अपशिष्ट प्रबंधन को लेकर व्यापक स्तर पर जागरूकता की नई अलख जगी है। राज्यभर में 17 सितंबर से प्रारंभ हुए ‘स्वच्छता ही सेवा- 2026’ अभियान के अंतर्गत ग्रामीण क्षेत्रों के 78 लाख 48 हजार 729 घरों तक प्रत्यक्ष जागरूकता गतिविधियां पहुंचाई जा चुकी हैं। इस दौरान राज्यभर में कुल 1 लाख 98 हजार 398 जागरूकता कार्यक्रमों का आयोजन किया गया, जिनमें 5 लाख 16 हजार से अधिक लोगों ने सक्रिय रूप से भाग लिया। अभियान की सफलता को आगे बढ़ाते हुए ग्रामीण विकास विभाग ने 1 से 15 अक्टूबर तक पूरे राज्य में ‘स्वच्छता पखवाड़ा’ आयोजित करने का निर्णय लिया है।

पांच प्रमुख स्तंभों पर केंद्रित रहा महाभियान

ग्रामीण विकास विभाग से प्राप्त विवरण के अनुसार, अभियान के दौरान प्रभातफेरी, पदयात्रा, स्वच्छता संवाद, मानव श्रृंखला, स्वच्छता चौपाल और स्वच्छता शपथ जैसी सघन गतिविधियां संचालित की गईं। इसमें स्थानीय जन प्रतिनिधियों, जीविका के महिला स्वयं सहायता समूहों (SHG/VO/CLF), स्वच्छता चैंपियनों और युवाओं को प्रमुखता से जोड़ा गया। पहले स्तंभ के अंतर्गत ग्राम पंचायतों में मुख्य मार्गों, हाट-बाजारों और भीड़भाड़ वाले क्षेत्रों में वर्षों से जमा कचरा स्थलों (ब्लैक स्पॉट्स) को चिन्हित कर पूरी तरह साफ किया गया। इसके अतिरिक्त सरकारी कार्यालयों, विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों, आंगनबाड़ी केंद्रों, ऐतिहासिक धरोहरों, नदियों और तालाबों के किनारों पर विशेष सफाई अभियान चलाए गए।

पर्यटन स्थलों की सफाई और कबाड़ से कला का अनूठा प्रयोग

गत 27 सितंबर को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर राज्य के प्रमुख ऐतिहासिक, धार्मिक और पर्यटन स्थलों पर स्वच्छता का विशेष अभियान चलाया गया। इसके तहत रिकॉर्ड 87 हजार 003 सार्वजनिक स्थलों की सफाई का कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया, जिसमें 44.17 लाख नागरिकों ने अपनी सहभागिता दर्ज कराई। इसी क्रम में ‘स्वच्छ पाठशाला’ और ‘युवा फॉर स्वच्छता’ पहल के तहत 39 हजार 454 विद्यालयों में गतिविधियां हुईं, जिनमें 2 लाख 43 हजार से अधिक छात्र शामिल हुए। वहीं, अभियान के पांचवें स्तंभ ‘स्वच्छता से समृद्धि’ के तहत कचरे को संसाधन में बदलने के लिए ‘कबाड़ से जुगाड़’ और ‘कबाड़ से कला’ को बढ़ावा दिया गया, जिसके अंतर्गत 60 हजार 80 कलाकृतियां और प्रविष्टियां दर्ज हुईं। साथ ही, अपशिष्ट प्रसंस्करण इकाइयों में तैयार जैविक खाद के प्रचार-प्रसार पर भी जोर दिया गया।

2 अक्टूबर को ग्राम सभा और ‘एक पेड़ मां के नाम’ का संकल्प

ग्रामीण विकास एवं सूचना व जनसंपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने अभियान की प्रगति पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि स्वच्छता अब ग्रामीण जनजीवन की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। उन्होंने विशेष रूप से जीविका दीदियों और स्वच्छता पर्यवेक्षकों के योगदान को रेखांकित किया। मंत्री ने बताया कि गुरुवार को ‘एक दिन, एक घंटा, एक साथ’ कार्यक्रम के तहत सामूहिक श्रमदान किया गया। वहीं, 2 अक्टूबर को ‘स्वच्छ भारत दिवस’ के अवसर पर राज्य की सभी ग्राम पंचायतों में विशेष ग्राम सभाओं का आयोजन किया जाएगा, जहां नागरिकों को स्वच्छता की शपथ दिलाई जाएगी और ‘एक पेड़ मां के नाम’ अभियान के अंतर्गत व्यापक पौधरोपण किया जाएगा।

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