Washington, (United States): पश्चिम एशिया में अमेरिका और ईरान के बीच कूटनीतिक और सैन्य तल्खी एक बार फिर चरम पर पहुंच गई है। खाड़ी क्षेत्र में बढ़ते तनाव और संभावित सैन्य टकराव की आशंकाओं के बीच अमेरिकी रक्षा मंत्रालय (पेंटागन) ने अपने विशालकाय एयरक्राफ्ट कैरियर ‘यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट’ को पश्चिम एशिया की ओर रवाना कर दिया है। कैलिफोर्निया के सैन डिएगो नौसैनिक अड्डे से रवाना हुए इस महाविशाल युद्धपोत के साथ पूरे कैरियर स्ट्राइक ग्रुप और लगभग 9,000 से 10,000 अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की टुकड़ी भी क्षेत्र की तरफ बढ़ रही है। इस कदम से अंतरराष्ट्रीय हलकों में यह सवाल तेजी से उठ रहा है कि क्या अमेरिका ईरान के खिलाफ किसी बड़े प्रत्यक्ष सैन्य अभियान की पृष्ठभूमि तैयार कर रहा है।
कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 9 और एम्फीबियस रेडी ग्रुप तैनात
अमेरिकी नौसेना के अनुसार, ‘यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट’ को 27 सितंबर को सैन डिएगो से रवाना किया गया है। इसके साथ ‘कैरियर स्ट्राइक ग्रुप 9’ को संबद्ध किया गया है, जिसमें मिसाइल विध्वंसक पोत, घातक लड़ाकू जेट्स और आधुनिक एयर डिफेंस सिस्टम शामिल हैं। यह शक्तिशाली बेड़ा नवंबर माह तक पश्चिम एशिया के समुद्री क्षेत्र में पहुंच जाएगा। इसके अलावा, पेंटागन ने ‘यूएसएस मेकिन आइलैंड एम्फीबियस रेडी ग्रुप’ को भी रवाना किया है, जिसमें समुद्र और जमीन दोनों पर युद्ध लड़ने में माहिर 2,000 से अधिक विशेष मरीन सैनिक सवार हैं। इस पूरी तैनाती के बाद पश्चिम एशिया में 9 हजार से अधिक अतिरिक्त अमेरिकी सैनिकों की सीधी मौजूदगी दर्ज होगी।
खाड़ी में एक साथ सक्रिय होंगे तीन एयरक्राफ्ट कैरियर
वर्तमान में पश्चिम एशिया के सामरिक समुद्री मार्गों पर ‘यूएसएस जॉर्ज एच.डब्ल्यू. बुश’ और ‘यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन’ जैसे परमाणु संचालित सुपर-कैरियर पहले से ही गश्त कर रहे हैं। यूएसएस थियोडोर रूजवेल्ट के वहां पहुंचते ही कुछ समय के लिए क्षेत्र में एक साथ तीन अमेरिकी विमानवाहक पोत सक्रिय नजर आएंगे। सैन्य विश्लेषकों का मानना है कि इतनी बड़ी तादाद में एयरक्राफ्ट कैरियर्स की मौजूदगी अमेरिकी नौसेना की आक्रामक मारक क्षमता को कई गुना बढ़ा देगी। हालांकि, पेंटागन के कुछ सूत्रों का यह भी कहना है कि इस तैनाती का एक उद्देश्य अगस्त में पहुंचे यूएसएस जॉर्ज वॉशिंगटन को नियमित चक्र के तहत बदलना भी हो सकता है, जो सामान्यतः जापान के योकोसुका बेस पर तैनात रहता है।
तेहरान पर बढ़ेगा सीधा मनोवैज्ञानिक और सामरिक दबाव
भले ही पेंटागन इसे नियमित रोटेशन या रक्षात्मक कदम करार दे, लेकिन रणनीतिक रूप से इस बड़े सैन्य जमावड़े से तेहरान पर भारी सामरिक और मनोवैज्ञानिक दबाव बनना तय है। अमेरिकी राष्ट्रपति के कड़े बयानों और खाड़ी में अमेरिकी युद्धपोतों की निरंतर बढ़ती संख्या ने इस क्षेत्र को बारूद के ढेर पर ला खड़ा किया है। विश्लेषकों की राय में, इस भारी भरकम सैन्य उपस्थिति से पश्चिम एशिया में किसी भी अप्रत्याशित घटनाक्रम या गलत आकलन के चलते बड़े क्षेत्रीय संघर्ष के भड़कने का खतरा काफी बढ़ गया है।




