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जहां कभी गोलियां गूंजती थीं, वहां अब दीवारों से ज्ञान ले रहे मासूम बच्चे

बिहार के रोहतास स्थित राजपुर प्रखंड के उर्दू प्राथमिक सरकारी विद्यालय खीरी में सख्त अनुशासन, बोलती दीवारों और समर्पित शिक्षकों की बदौलत ऐतिहासिक बदलाव आया है।
उर्दू प्राथमिक सरकारी विद्यालय खीरी
उर्दू प्राथमिक सरकारी विद्यालय खीरी

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Rohtas: बिहार के राजपुर प्रखंड स्थित उर्दू प्राथमिक सरकारी विद्यालय खीरी की तस्वीर अब पूरी तरह बदल चुकी है। 1990 के दशक में खौफ और बंदूकों की गूंज के लिए पहचाने जाने वाले इस इलाके में अब बच्चे अनुशासित माहौल में शिक्षा ग्रहण कर रहे हैं। विद्यालय में प्रार्थना के लिए बच्चे किसी घंटी की आवाज का इंतजार किए बिना खुद-ब-खुद कतारबद्ध हो जाते हैं। इसके अलावा दोपहर के समय मध्याह्न भोजन भी बच्चे शांतिपूर्वक योग मुद्रा में बैठकर ग्रहण करते हैं।

दीवारों से पढ़ाई और सख्त अनुशासन के नियम

इस विद्यालय की सबसे बड़ी खासियत इसकी दीवारें हैं, जिन पर महापुरुषों के विचार, सामान्य ज्ञान, राज्यों की राजधानियां और योग की मुद्राएं अंकित हैं। बच्चे किताबों से पहले इन दीवारों के माध्यम से सामान्य ज्ञान और संस्कार सीखते हैं। इसके साथ ही विद्यालय में ड्रेस कोड का पालन अनिवार्य किया गया है। बिना ड्रेस के किसी भी बच्चे को प्रवेश की अनुमति नहीं मिलती है। यदि कोई छात्र अनुपस्थित रहता है, तो अभिभावकों को विद्यालय प्रशासन को इसकी जानकारी देनी होती है।

50 से 154 हुई छात्रों की संख्या

प्रधानाध्यापक धनंजय मिश्रा ने बताया कि 22 जुलाई 2025 को जब उन्होंने विद्यालय का प्रभार संभाला था, तब यहां 50 से भी कम छात्र नामांकित थे। शिक्षकों के निरंतर प्रयास और गांव-गांव जाकर चलाए गए जागरूकता अभियान के बाद वर्तमान में छात्रों की संख्या बढ़कर 154 हो गई है। इस पहल के तहत महाज (डोम) समाज के बच्चे भी पहली बार विद्यालय की चौखट तक पहुंचे हैं और शिक्षा से जुड़ रहे हैं।

निजी खर्च से बच्चों की मदद कर रहे शिक्षक

विद्यालय में तैनात सातों शिक्षक अपने जन्मदिन या शादी की सालगिरह जैसे व्यक्तिगत मौकों पर अनावश्यक खर्च करने के बजाय उन पैसों से गरीब बच्चों के लिए ड्रेस और किताबों का प्रबंध करते हैं। प्रधानाध्यापक के अनुसार, यह प्रयास किसी प्रचार के लिए नहीं बल्कि समाज को शिक्षा के प्रति जागरूक करने के उद्देश्य से किया जा रहा है।

अभिभावकों का भरोसा और स्थानीय प्रतिक्रिया

स्थानीय अभिभावक सुनील कुमार लाल और आशुतोष कुमार लाल का कहना है कि जो अनुशासन और संस्कार इस सरकारी विद्यालय में देखने को मिल रहे हैं, वे निजी स्कूलों में भी दुर्लभ हैं। अभिभावकों के अनुसार, शिक्षकों के इस समर्पित प्रयास से बच्चों के आत्मविश्वास और पढ़ाई के स्तर में बड़ा सुधार देखने को मिला है। – स्रोत: ETV भारत

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