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हजारों मजदूरों ने ठुकराई बायोमेट्रिक हाजिरी, सेल को करोड़ों का झटका

Jamshedpur News: पश्चिमी सिंहभूम जिले की सेल संचालित किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया लौह अयस्क खदानों में सोमवार को बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर श्रमिकों और प्रबंधन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया। पहली पाली से ही हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम

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Jamshedpur News:  पश्चिमी सिंहभूम जिले की सेल संचालित किरीबुरू, मेघाहातुबुरु, गुवा और चिड़िया लौह अयस्क खदानों में सोमवार को बायोमेट्रिक उपस्थिति प्रणाली को लेकर श्रमिकों और प्रबंधन के बीच टकराव खुलकर सामने आ गया। पहली पाली से ही हजारों श्रमिकों ने बायोमेट्रिक मशीन के माध्यम से हाजिरी दर्ज करने से इनकार कर दिया, जिसके कारण खदानों में उत्पादन, लोडिंग, परिवहन और अन्य सभी गतिविधियां पूरी तरह प्रभावित हो गईं।

सुबह ड्यूटी पर पहुंचे कर्मचारियों का आरोप था कि जब वे पूर्व की व्यवस्था के तहत पंचिंग कार्ड से उपस्थिति दर्ज कराने टाइम ऑफिस पहुंचे तो वहां न तो पंचिंग कार्ड उपलब्ध थे और न ही रजिस्टर तथा टाइम कीपर मौजूद थे। इससे कर्मचारी असमंजस की स्थिति में आ गए और बड़ी संख्या में श्रमिक टाइम ऑफिस के बाहर जमा होकर प्रबंधन के खिलाफ नारेबाजी करने लगे। उनका कहना था कि पुरानी व्यवस्था को अचानक समाप्त कर कर्मचारियों पर नई प्रणाली थोपने का प्रयास किया जा रहा है।

विवाद उस समय और बढ़ गया जब किरीबुरू खदान की रात्रि पाली में कार्यरत कर्मचारियों ने आरोप लगाया कि ड्यूटी समाप्त होने के बाद कार्ड आउट करने पहुंचे तो पंचिंग कार्ड वहां से गायब मिले। मजदूर नेताओं ने इसे सुनियोजित कार्रवाई बताते हुए कहा कि इससे श्रमिकों को बायोमेट्रिक प्रणाली अपनाने के लिए दबाव में लाने की कोशिश की जा रही है।

मजदूर नेता राजेंद्र सिंधिया और गुवा के वरिष्ठ श्रमिक नेता रामा पाण्डे ने कहा कि सभी यूनियनें इस मुद्दे पर एकजुट हैं। उनका दावा है कि फेस रीडिंग आधारित बायोमेट्रिक प्रणाली को बिना यूनियनों की सहमति और सेवा शर्तों पर स्पष्ट लिखित आश्वासन दिए लागू किया जा रहा है। यूनियनों का कहना है कि मामला मुख्य श्रम आयुक्त (केंद्रीय) के समक्ष विचाराधीन है, इसलिए अंतिम निर्णय आने तक पुरानी व्यवस्था जारी रखी जानी चाहिए।

उधर, उत्पादन ठप होने से सेल को प्रतिदिन करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका जताई जा रही है। यदि जल्द समाधान नहीं निकला तो यह विवाद बड़े औद्योगिक संघर्ष का रूप ले सकता है।

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