रांची: झारखंड की राजनीति और झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) के इतिहास में पिछले कुछ वर्षों का दौर बेहद भावुक और रणनीतिक दृष्टिकोण से अत्यंत चुनौतीपूर्ण रहा है। राज्य निर्माण आंदोलन से लेकर जमीनी स्तर पर जनता की आवाज उठाने वाले झामुमो के कई कद्दावर और निष्ठावान नेताओं का उनके कार्यकाल के दौरान ही असामयिक निधन हो गया। इन नेताओं ने न केवल अपने मंत्रालयों का कुशल संचालन किया, बल्कि राज्य के सामाजिक और शैक्षणिक ताने-बाने को मजबूत करने में भी अभूतपूर्व योगदान दिया।
अल्पसंख्यक कल्याण से लेकर शिक्षा और नगर विकास जैसे महत्वपूर्ण विभागों को संभालने वाले इन नेताओं के जाने से पार्टी और सरकार में जो शून्यता पैदा हुई है, उसकी भरपाई आसान नहीं है। आइए जानते हैं झामुमो के उन प्रमुख नेताओं और मंत्रियों के बारे में, जिनका कार्यकाल के दौरान असामयिक निधन हुआ:
1. हाजी हुसैन अंसारी (पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण एवं निबंधन मंत्री)
झारखंड आंदोलन के अग्रणी योद्धा और मधुपुर विधानसभा क्षेत्र से चार बार विधायक रहे हाजी हुसैन अंसारी का अक्टूबर 2020 में निधन हो गया था।
- पद एवं मंत्रालय: हेमंत सोरेन सरकार में वे अल्पसंख्यक कल्याण एवं निबंधन विभाग के कैबिनेट मंत्री थे।
- राजनीतिक योगदान: हाजी हुसैन अंसारी झारखंड के इतिहास में पहले मुस्लिम कैबिनेट मंत्री बने थे। वे 2004 में विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष की जिम्मेदारी भी संभाल चुके थे। दिशोम गुरु शिबू सोरेन के करीबी सहयोगियों में गिने जाने वाले हाजी हुसैन ने अलग राज्य के गठन में जेल यात्राएं तक की थीं।
2. जगरनाथ महतो (पूर्व शिक्षा एवं उत्पाद निषेध मंत्री)
गिरिडीह जिले के डुमरी विधानसभा क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करने वाले जगरनाथ महतो को पूरा झारखंड प्यार से “टाइगर जगरनाथ” के नाम से जानता था। अप्रैल 2023 में इलाज के दौरान चेन्नई के अस्पताल में उनका निधन हो गया था।
- पद एवं मंत्रालय: वे राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग तथा उत्पाद एवं मद्य निषेध विभाग के कैबिनेट मंत्री थे।
- राजनीतिक योगदान: जगरनाथ महतो अपनी बेबाक शैली और जनता के बीच सीधे संवाद के लिए जाने जाते थे। उनके कार्यकाल की सबसे बड़ी उपलब्धि राज्य के करीब 65 हजार पारा शिक्षकों की सेवा शर्तों का स्थायीकरण और उनकी मांगों को पूरा करना माना जाता है। गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं और फेफड़े के प्रत्यारोपण के बाद भी वे अपने अंतिम दिनों तक प्रशासनिक कार्यों में सक्रिय रहे।
3. रामदास सोरेन (पूर्व स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री)
पूर्वी सिंहभूम जिले के घाटशिला विधानसभा से विधायक रहे रामदास सोरेन का अगस्त 2025 में नई दिल्ली में इलाज के दौरान निधन हो गया।
- पद एवं मंत्रालय: वे जल संसाधन, उच्च एवं तकनीकी शिक्षा के बाद राज्य के स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता विभाग के कैबिनेट मंत्री के रूप में कार्य संभाल रहे थे।
- राजनीतिक योगदान: ग्राम प्रधान के पद से अपनी राजनीतिक यात्रा शुरू करने वाले रामदास सोरेन ने कोल्हान प्रमंडल में झामुमो के संगठन को मजबूत करने में मुख्य भूमिका निभाई। वे संथाली भाषा और जनजातीय अधिकारों की आवाज को उठाने वाले समर्पित नेताओं में गिने जाते थे।
4. सुदिव्य कुमार सोरेन / सुदिव्य कुमार सोनू (पूर्व उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा नगर विकास मंत्री)
गिरिडीह विधानसभा क्षेत्र से लोकप्रिय विधायक और झामुमो के मुख्य रणनीतिकारों में शामिल सुदिव्य कुमार सोनू का 5 सितंबर 2026 में हृदय गति रुकने (हार्ट अटैक) से अचानक असामयिक निधन हो गया।
- पद एवं मंत्रालय: वे उच्च एवं तकनीकी शिक्षा, नगर विकास एवं आवास, पर्यटन, कला-संस्कृति तथा खेल एवं युवा कार्य जैसे अति-महत्वपूर्ण विभागों के कैबिनेट मंत्री थे।
- राजनीतिक योगदान: मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के बेहद करीबी और विश्वसनीय सहयोगियों में शामिल सुदिव्य कुमार को पार्टी का थिंक-टैंक माना जाता था। विधानसभा में नीतिगत बहसों से लेकर चुनावी रणनीति तैयार करने तक में उनकी भूमिका केंद्रीय होती थी। उनके असामयिक निधन पर राज्य सरकार द्वारा दो दिनों के राजकीय शोक की घोषणा की गई।
राजनीतिक और सामाजिक असर
इन वरिष्ठ और जनाधार वाले नेताओं के असमय जाने से न केवल संबंधित विधानसभा क्षेत्रों के लोगों को झटका लगा है, बल्कि पार्टी के अंदर भी जमीनी नेतृत्व की एक बड़ी क्षति हुई है। झामुमो ने इन मौकों पर उनके परिजनों को जिम्मेदारी सौंपकर और सहानुभूति के आधार पर संगठन को संभाला, फिर भी संगठन और सरकार दोनों में इन अनुभवी दिग्गजों का अनुभव और स्थान सदा अपूरणीय रहेगा।

1. हाजी हुसैन अंसारी (पूर्व अल्पसंख्यक कल्याण एवं निबंधन मंत्री)
2. जगरनाथ महतो (पूर्व शिक्षा एवं उत्पाद निषेध मंत्री)
3. रामदास सोरेन (पूर्व स्कूली शिक्षा एवं साक्षरता मंत्री)
4. सुदिव्य कुमार सोरेन / सुदिव्य कुमार सोनू (पूर्व उच्च एवं तकनीकी शिक्षा तथा नगर विकास मंत्री)


