रांची: 12 रबी-उल-अव्वल शरीफ के मुबारक मौके पर पूरे झारखंड में पैगंबर हज़रत मुहम्मद मुस्तफ़ा (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का यौम-ए-पैदाइश यानी ‘ईद मिलाद-उन-नबी’ बेहद अकीदत, सम्मान और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। राजधानी रांची समेत राज्य के कोने-कोने में सुब्ह-ए-सादिक से ही जश्न का माहौल है और शांतिपूर्ण ढंग से जुलूस-ए-मोहम्मदी निकाला जायेगा।
दुनिया के लिए रहमत बनकर आए पैगंबर
इस्लामिक मान्यताओं और ऐतिहासिक संदर्भों के अनुसार, मक्का शरीफ में हज़रत अब्दुल्लाह के घर पूरी कायनात के लिए रहमत बनकर आए हज़रत मुहम्मद (सल्लल्लाहु अलैहि व सल्लम) का आगमन दुनिया में खुशियां और हरियाली लेकर आया। पैगंबर की वालिदा (मां) हज़रत आमना (रज़ी अल्लाहू अनहा) के बयानों का ज़िक्र करते हुए कहा जाता है कि उनके मुबारक जन्म के वक्त पूरी दुनिया नूर से रोशन हो गई थी। कुरान-ए-पाक की आयतों के हवाले से इसे अल्लाह तआला की सबसे बड़ी नेमत और रहमत करार दिया गया है, जिस पर खुशियां मनाना हर मोमिन का अधिकार है।
इदारे शरिया की मुबारकबाद और दिशा-निर्देश
इदारे शरिया झारखंड के नाजिम-ए-आला मौलाना मुहम्मद कुतुबुद्दीन रिज़वी ने प्रदेश के करोड़ों नागरिकों को ईद मिलाद-उन-नबी की दिली मुबारकबाद पेश की। उन्होंने कहा कि तमाम ईदों में यह दिन सबसे मुकद्दस और अफज़ल (सर्वश्रेष्ठ) है, क्योंकि इसी दिन दुनिया को इंसानियत और सच्चाई की राह दिखाने वाले नबी का ज़ुहूर हुआ।
मौलाना कुतुबुद्दीन रिज़वी ने जुलूस में शामिल होने वाले अकीदतमंदों से खास अपील की:
- शांति और भाईचारा: जुलूस के दौरान धार्मिक सहिष्णुता, आपसी सौहार्द और सामाजिक समरसता का पूरा ख्याल रखा जाए।
- गाइडलाइंस का पालन: अपने-अपने इलाकों की जुलूस कमेटियों द्वारा जारी निर्देशों और नियमों के तहत ही जुलूस निकाले जाएं।
- ज़रूरतमंदों की मदद: इस मुबारक मौके पर महफिलें सजाने के साथ-साथ सबील लगाने, लंगर बांटने और गरीबों व असहायों की मदद करने का आह्वान किया गया।
प्रशासन से सुरक्षा और ट्रैफिक व्यवस्था की मांग
इदारे शरिया ने राज्य सरकार और स्थानीय प्रशासन से अपील की है कि त्योहार के अवसर पर सुरक्षा, कानून व्यवस्था और ट्रैफिक प्रबंधन के पुख्ता इंतजाम किए जाएं, ताकि श्रद्धालुओं को किसी प्रकार की असुविधा न हो। समाज के सभी वर्गों से इस मुबारक जश्न में आपसी मोहब्बत के साथ शामिल होने का संदेश दिया गया है।




