धनबाद: झारखंड के धनबाद जिले का बरवाअड्डा थाना इन दिनों राज्य के सबसे बड़े सियासी और कानूनी ड्रामे का केंद्र बना हुआ है। झारखंड लोकतांत्रिक क्रांतिकारी मोर्चा (JLKM) के प्रमुख और डुमरी विधानसभा सीट से विधायक जयराम महतो एक बेहद पेचीदा और गंभीर विवाद में घिर गए हैं। यह पूरा मामला केवल थाने के भीतर हुई धक्का-मुक्की तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसमें फर्जी दस्तावेजों का खेल, जातिसूचक शब्द, जान से मारने की नीयत से गला दबाने का आरोप, कथित वायरल ऑडियो और तीन-तीन काउंटर प्राथमिकी (FIR) शामिल हो चुके हैं।
विवाद की जड़: फर्जी मुहर और प्रमाण पत्र का मामला
इस पूरे घटनाक्रम की पटकथा बड़ापिछरी पंचायत से लिखी जानी शुरू हुई थी। आरोप है कि पंचायत की मुखिया यशोदा देवी के फर्जी दस्तखत, लेटर पैड और सरकारी मुहर का दुरुपयोग कर गैर-कानूनी तरीके से जाति प्रमाण पत्र, आवासीय प्रमाण पत्र और वंशावली बनवाई जा रही थी। इस मामले में बरवाअड्डा थाना पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए 21 अगस्त को JLKM के स्थानीय नेता गणेश दास को हिरासत में लिया और पूछताछ के लिए थाने की हाजत में रखा।
थाने में विधायक का आगमन और हाई-वोल्टेज ड्रामा
गणेश दास को हिरासत में लिए जाने की खबर फैलते ही विधायक जयराम महतो अपने करीब 40 से 50 समर्थकों के साथ देर रात बरवाअड्डा थाना पहुंच गए। विधायक पक्ष का दावा था कि पुलिस ने हाजत में बंद गणेश दास के साथ बर्बरता और मारपीट की है। इसी दौरान दूसरी तरफ से मुखिया यशोदा देवी के समर्थक और उनका बेटा प्रदीप कुमार रजक भी थाने परिसर में आ धमके।
दोनों गुटों के आमने-सामने आते ही थाना परिसर जंग के मैदान में तब्दील हो गया। जमकर कहासुनी, धक्का-मुक्की और हाथापाई हुई। आरोप है कि समर्थकों ने थाना प्रभारी के टेबल पर मुक्का मारकर नामपट्ट (पदनाम बोर्ड) तोड़ दिया और हाजत का दरवाजा खोलकर आरोपी को छुड़ाने की कोशिश की।
इसी हंगामे के बीच मुखिया के बेटे प्रदीप रजक ने आरोप लगाया कि विधायक जयराम महतो ने उनके खिलाफ अभद्र जातिसूचक शब्दों का इस्तेमाल किया और जान से मारने की नीयत से उनका गला दबाने का प्रयास किया।
थानेदार से गाली-गलौज और ‘वर्दी उतरवाने’ की धमकी
घटना के बाद सोशल मीडिया पर एक कथित ऑडियो और वीडियो कॉल की रिकॉर्डिंग तेजी से वायरल हो गई। आरोप है कि जयराम महतो ने बरवाअड्डा थाना प्रभारी रवि कुमार को व्हाट्सएप कॉल किया और बेहद अभद्र भाषा व भद्दी गालियों का इस्तेमाल किया। कॉल में ‘सरकार बदलते ही देख लेने’ और ‘वर्दी उतरवा देने’ की खुली चेतावनी दी गई। थाना प्रभारी ने सतर्कता बरतते हुए इस पूरी बातचीत को दूसरे मोबाइल फोन से रिकॉर्ड कर लिया, जो अब जांच का मुख्य हिस्सा बन चुका है। हालांकि JLKM समर्थकों का कहना है कि थाना प्रभारी कानून का भय दिखाकर विधि विरूद्ध कार्य कर रहे थे। जब उनको कानून के दायरे में रहकर कार्य करने को कहा गया तो आगबबूला हो गए और रिकॉर्डिंग चालू कर नरम हो गए ताकि एक पक्षीय सबूत बनाया जा सके।
तीन-तरफा कानूनी शिकंजा (Triple Counter FIRs)
मामला अब पूरी तरह कानूनी पेचीदगियों में उलझ गया है और तीन अलग-अलग शिकायतें दर्ज हुई हैं:
- पुलिस की FIR: थाना प्रभारी रवि कुमार के बयान पर विधायक जयराम महतो, 10 नामजद समर्थकों और 50 अज्ञात लोगों के खिलाफ सरकारी काम में बाधा डालने, पुलिस पदाधिकारियों को धमकाने, सोशल मीडिया पर झूठी अफवाह फैलाकर उपद्रवी भीड़ जुटाने के तहत केस (कांड संख्या 146/26) दर्ज किया गया है।
- मुखिया पुत्र की FIR: प्रदीप रजक की शिकायत पर विधायक के खिलाफ अनुसूचित जाति/जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम (SC/ST Act) और मारपीट की धाराओं में प्राथमिकी दर्ज हुई है।
- विधायक पक्ष की Counter FIR: विधायक जयराम महतो ने भी पलटवार करते हुए धनबाद सांसद ढुलू महतो के समर्थकों पर थाने में जानलेवा हमला करने, गला दबाने और समर्थक से सोने की चेन व नकदी छीनने का आरोप लगाते हुए काउंटर केस दर्ज कराया है।
विधायक की सफाई बनाम पुलिस एसोसिएशन का अल्टीमेटम
विवाद पर अपनी सफाई देते हुए विधायक जयराम महतो ने कहा कि वायरल ऑडियो पूरी तरह से एडिट (संपादित) किया गया है। 11 मिनट की बातचीत में से चुनिंदा हिस्से को काटकर उनकी छवि खराब करने की नीयत से सार्वजनिक किया गया है। उन्होंने निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए CCTV फुटेज सार्वजनिक करने की चुनौती दी है।
दूसरी तरफ, झारखंड पुलिस मेंस एसोसिएशन ने इस घटना पर कड़ा आक्रोश जताया है। एसोसिएशन ने विधायक से 24 घंटे के भीतर माफी मांगने को कहा है और चेतावनी दी है कि यदि कार्रवाई नहीं हुई तो पुलिसकर्मी कार्य बहिष्कार कर चरणबद्ध आंदोलन शुरू करेंगे। फिलहाल धनबाद पुलिस CCTV फुटेज और डिजिटल साक्ष्यों को खंगाल रही है।




