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2025 से खत्म होगा माथेरान का हाथ रिक्शा युग, सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला

India News: मुंबई से करीब 100 किलोमीटर दूर हिल स्टेशन माथेरान में अभी भी चल रही ब्रिटिशकालीन हाथ रिक्शा सेवा आखिरकार बंद होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी लाइसेंसधारी हाथ रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी

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India News: मुंबई से करीब 100 किलोमीटर दूर हिल स्टेशन माथेरान में अभी भी चल रही ब्रिटिशकालीन हाथ रिक्शा सेवा आखिरकार बंद होने जा रही है। सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्ट कर दिया है कि सभी लाइसेंसधारी हाथ रिक्शा चालकों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराने की ज़िम्मेदारी महाराष्ट्र सरकार की होगी। खबर है कि मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई की अध्यक्षता वाली पूर्ण पीठ ने राज्य सरकार को अगले 6 महीनों में इस अमानवीय सेवा को बंद करने का आदेश दिया है।

सुप्रीम कोर्ट ने महाराष्ट्र सरकार को दिया आदेश, माथेरान में अमानवीय हाथ रिक्शा पूरी तरह बंद करें

बताया गया है कि वर्तमान में 94 लाइसेंसधारी हाथ रिक्शा चालक हैं। इनमें से केवल 20 को ही ई-रिक्शा चलाने की अनुमति दी गई है। लेकिन बाकी 74 हाथ रिक्शा चालकों का क्या? उन्हें अभी भी यह अमानवीय काम करना पड़ रहा है क्योंकि उनके पास कोई और रोज़गार उपलब्ध नहीं है। इस संदर्भ में मुख्य न्यायाधीश भूषण गवई, न्यायमूर्ति के. विनोद चंद्रन और न्यायमूर्ति एन. वी. अंजारिया की पीठ ने बुधवार को यह फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश ने यह राय व्यक्त की है कि भारत जैसे विकासशील देश में मानवीय गरिमा की मूल अवधारणा के विरुद्ध ऐसी प्रथा की अनुमति देना सामाजिक और आर्थिक न्याय के संवैधानिक वादों को कमज़ोर करेगा।

गुजरात के केवड़िया में स्थापित सरदार वल्लभभाई पटेल की सबसे ऊँची प्रतिमा के पास भी स्थानीय लोगों को ई-रिक्शा किराए पर दिए गए थे। इसी आधार पर, माथेरान में स्थानीय आदिवासियों को ई-रिक्शा उपलब्ध कराना राज्य सरकार की ज़िम्मेदारी होगी। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में यह भी स्पष्ट किया है कि इसे पूरा करते समय पैसों की कमी का बहाना नहीं बनाया जाना चाहिए। इसलिए, सर्वोच्च न्यायालय ने राज्य सरकार को 2025 के अंत तक, चरणों में ही सही, हाथ रिक्शा को पूरी तरह से बंद करने का निर्देश दिया है। सर्वोच्च न्यायालय ने अपने फैसले में ज़िला कलेक्टर और ज़िला सत्र न्यायाधीश की माथेरान निगरानी समिति को यह सुनिश्चित करने का भी निर्देश दिया है कि केवल उचित लाइसेंस वाले व्यक्तियों को ही ई-रिक्शा मिले।

क्या महत्व है माथेरान का ?

माथेरान महाराष्ट्र के सबसे लोकप्रिय पर्यटन स्थलों में से एक है। माथेरान महाराष्ट्र में अंग्रेजों द्वारा खोजी गई एक ठंडी जगह के रूप में जाना जाता है। माथेरान की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह भारत का एकमात्र हिल स्टेशन है जहां किसी भी तरह के मोटर वाहन की अनुमति नहीं है। यहां की हवा एकदम शुद्ध और वातावरण शांत रहता है, जो शहरों की भीड़-भाड़ और प्रदूषण से बिलकुल अलग अनुभव देता है। समुद्र तल से करीब 800 मीटर की ऊंचाई पर स्थित ये छोटा-सा हिल स्टेशन घने जंगलों, घाटियों, झीलों और खूबसूरत व्यू पॉइंट्स से घिरा है। यहां की टॉय ट्रेन यात्रा, घोड़े की सवारी, और प्राकृतिक नजारे इसे और भी खास बनाते हैं। मानसून के मौसम में माथेरान की हरियाली, झरने और कोहरे से ढकी पहाड़ियां किसी जन्नत से कम नहीं लगतीं। इसकी एक और खास बात यह है कि यह मुंबई और पुणे से बहुत नजदीक है, जिससे लोग आसानी से वीकेंड पर यहां घूमने आ सकते हैं।

आज भी पर्यटकों के लिए हाथ रिक्शा ही एकमात्र सुविधाजनक विकल्प

देश को आज़ाद हुए 78 साल हो गए हैं। लेकिन माथेरान में आज भी कुछ परिवार अपनी आजीविका के लिए हाथ रिक्शा पर निर्भर हैं। हालाँकि पिछले कुछ महीनों में पर्यटकों के लिए पर्यावरण-अनुकूल ई-रिक्शा शुरू किए गए हैं, लेकिन वहाँ आने वाले पर्यटकों की संख्या के मुकाबले उनकी संख्या नगण्य है। 2025 में हाथ ठेले पर बैठकर एक-दूसरे को खींचते लोगों की तस्वीर कितनी सटीक है? अगर ऐसा कोई सवाल भी है, तो यह नहीं भूलना चाहिए कि हाथ ठेले खींचने वालों के घर भी उन पर चल रहे हैं।

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