Patna: बिहार में पशुपालन और पशु चिकित्सा सेवाओं को गांवों तक पहुंचाने की दिशा में नई पहल शुरू की गई है। बिहार स्टेट मिल्क को-ऑपरेटिव फेडरेशन लिमिटेड (कॉम्फेड) ने ‘सुधा सखी’ पहल की शुरुआत की है। इसके तहत ग्रामीण महिलाओं को पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा समेत पशुपालन से जुड़ी जरूरी सेवाओं का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। इस पहल का विस्तार राज्य की 8,053 पंचायतों तक करने की योजना है। पहले चरण में 38 जिलों से चयनित महिलाओं के लिए छह दिवसीय आवासीय प्रशिक्षण कार्यक्रम शुरू किया गया है। पटना स्थित कॉम्फेड के सभागार में 31 अगस्त से शुरू हुआ यह प्रशिक्षण 5 सितंबर तक चलेगा।
पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा से लेकर कृत्रिम गर्भाधान तक प्रशिक्षण
प्रशिक्षण के दौरान सुधा सखियों को पशुओं की प्राथमिक चिकित्सा, संतुलित पशु आहार, कृत्रिम गर्भाधान और वैज्ञानिक पशुपालन से जुड़ी जरूरी जानकारी दी जा रही है। प्रशिक्षण पूरा होने के बाद ये महिलाएं गांव स्तर पर पशुपालकों और पशु चिकित्सकों के बीच महत्वपूर्ण कड़ी के रूप में काम करेंगी। इस पहल से ग्रामीण इलाकों में पशुपालकों को अपने गांव के आसपास ही शुरुआती स्तर की पशु चिकित्सा और विशेषज्ञ मार्गदर्शन उपलब्ध कराने में मदद मिलेगी। वहीं महिलाओं के लिए आत्मनिर्भरता और स्थायी रोजगार के नए अवसर भी पैदा होंगे।
7 हजार जीविका दीदियां पहले ही बन चुकी हैं पशु सखी
कॉम्फेड और जीविका के संयुक्त प्रयास से इससे पहले करीब 7 हजार जीविका दीदियों को डेयरी और पशुपालन का प्रशिक्षण दिया जा चुका है। प्रशिक्षण प्राप्त ये पशु सखियां अब अपने-अपने गांवों में स्वयं सहायता समूह (SHG) की महिला सदस्यों को भी पशुपालन से जुड़ी जानकारी दे रही हैं। पशुपालन क्षेत्र के पहले चरण में पशु सखियों, आजीविका विशेषज्ञों और प्रत्येक प्रखंड के CLF नोडल को जिला स्तर पर प्रशिक्षण दिया गया था। इसके लिए कॉम्फेड और जीविका की ओर से जिला स्तरीय नोडल पदाधिकारियों का चयन किया गया था।
भेड़-बकरी और सूअर पालन करने वाली महिलाओं को भी मिलेगा प्रशिक्षण
विभाग के अनुसार, पशु सखियों का काम सिर्फ डेयरी गतिविधियों तक सीमित नहीं रहेगा। भेड़, बकरी, सूअर समेत अन्य लघु पशुओं का पालन करने वाली महिलाओं को भी अलग से प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस तरह ‘सुधा सखी’ पहल के जरिए एक ओर गांवों में पशुपालन से जुड़ी प्राथमिक सेवाओं को मजबूत करने की कोशिश होगी, वहीं दूसरी ओर ग्रामीण महिलाओं को पशुपालन आधारित आजीविका से जोड़ने का रास्ता भी तैयार होगा।




