Patna: बेकार सामानों को कचरा समझकर फेंक देने की पुरानी धारणा को बदलते हुए बिहार के भोजपुर जिले ने ‘वेस्ट टू आर्ट’ (अपशिष्ट से कला) के क्षेत्र में एक प्रेरणादायक मिसाल कायम की है। स्वच्छ भारत मिशन (ग्रामीण) के तहत शुरू हुई इस अनूठी पहल से जिले में पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलने के साथ-साथ महिलाओं के लिए स्वरोजगार और अतिरिक्त आमदनी के नए रास्ते खुले हैं।
वेस्ट टू आर्ट पार्क से हुई थी नवाचार की शुरुआत
साल 2024 में ‘स्वच्छता ही सेवा’ अभियान के दौरान भोजपुर जिला जल एवं स्वच्छता समिति ने होम डेकोर अलाइव, क्लाइमेट रिजिलिएंस और जन विकास क्रांति जैसी गैर-सरकारी संस्थाओं (NGO) के सहयोग से एक खास वेस्ट टू आर्ट पार्क की स्थापना की थी। इस पार्क में ‘थ्री-आर’ (रिफ्यूज, रियूज और रिसाइकिल) के सिद्धांत पर पुराने कपड़ों, प्लास्टिक की बोतलों और अन्य बेकार सामग्रियों से बनी आकर्षक कलाकृतियों को प्रदर्शित किया गया था। इस नवाचार की लोकप्रियता को देखते हुए तत्कालीन डीएम के निर्देश पर जिले के सभी सरकारी आयोजनों और दफ्तरों में अतिथियों को पारंपरिक ताजे फूलों के गुलदस्ते की जगह वेस्ट-टू-आर्ट से बने गमलों में पौधे भेंट करने की नई परंपरा शुरू की गई।
पुराने कपड़ों और प्लास्टिक से ऐसे बनती हैं कलाकृतियां
भोजपुर में कबाड़ से खूबसूरत और टिकाऊ उत्पाद तैयार करने में तकनीक और कला का बेहतरीन तालमेल दिख रहा है। कबाड़ से एकत्र फटे-पुराने कपड़ों को धोकर उनकी धुनाई की जाती है, जिससे बारीक रेशा बनता है। इसके बाद रेशे में प्लास्टर ऑफ पेरिस (POP) मिलाकर सांचों में ढाला जाता है और उस पर मनमोहक पॉलिश व पारंपरिक लोक कला की पेंटिंग की जाती है। इसी तरह प्लास्टिक कचरे को गलाकर आकर्षक शो-पीस बनाए जा रहे हैं।
जिला समन्वयक रंजय बैठा ने बताया कि पहले चरण में स्वयं सहायता समूह की 25 महिलाओं को प्रशिक्षित किया गया। अब ये ट्रेंड जीविका दीदियां अन्य महिलाओं को सिखाकर मजबूत कम्युनिटी नेटवर्क तैयार कर रही हैं। होम डेकोर अलाइव के संस्थापक सौरभ कुमार के मुताबिक, इन कलाकृतियों की मांग अब सिर्फ सरकारी दफ्तरों तक सीमित नहीं है, बल्कि शादियों व निजी समारोहों में भी लोग इन्हें उपहार स्वरूप अपना रहे हैं।
ग्रामीण विकास मंत्री ने की सराहना
ग्रामीण विकास तथा सूचना एवं जन संपर्क विभाग के मंत्री श्रवण कुमार ने इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि महिलाओं के हाथों से तैयार ये कलाकृतियां पर्यावरण और आजीविका दोनों के लिए मिसाल हैं। स्वच्छ भारत मिशन और जीविका के संगम से अपशिष्ट को उपयोगी संसाधन बनाया जा रहा है और बिहार सरकार ऐसे प्रयासों को प्रोत्साहित करने के लिए पूरी तरह तत्पर है।





