Patna: बिहार विधान परिषद् के पूर्व सदस्य देवेश कुमार ने शुक्रवार को बिहार राज्य योजना पर्षद के उपाध्यक्ष का पदभार विधिवत संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के बाद उन्होंने राज्य के समावेशी, संतुलित और सतत विकास के लिए योजना पर्षद की भूमिका को और अधिक प्रभावी व सुदृढ़ बनाने पर बल दिया। उन्होंने कहा कि ‘विकसित बिहार@2047’ के विजन को धरातल पर उतारने के लिए सुनियोजित, साक्ष्य-आधारित और दीर्घकालिक योजना निर्माण बेहद जरूरी है।
विभागों के साथ समन्वय से तैयार होगी रणनीति
उपाध्यक्ष देवेश कुमार ने कहा कि बिहार राज्य योजना पर्षद प्रदेश के सर्वांगीण विकास की दिशा तय करने और विभिन्न क्षेत्रों में दीर्घकालिक रणनीति बनाने वाली शीर्ष संस्था है। राज्य में मौजूद संसाधनों का कुशल एवं पारदर्शी उपयोग करते हुए तय लक्ष्यों को हासिल करने पर काम किया जाएगा। उन्होंने रेखांकित किया कि बिहार तेजी से विकास के नए आयाम छू रहा है, इसलिए भविष्य की चुनौतियों को ध्यान में रखकर नीतियां बनाई जाएंगी। पर्षद सभी सरकारी विभागों के साथ बेहतर तालमेल बनाकर प्राथमिकताओं और योजनाओं पर जरूरी मार्गदर्शन देगी।
1972 में हुआ था योजना पर्षद का गठन
उल्लेखनीय है कि बिहार राज्य योजना पर्षद का गठन वर्ष 1972 में किया गया था। पर्षद राज्य की वार्षिक और दीर्घकालीन योजनाओं के निर्माण, अध्ययन, शोध तथा विकास कार्यक्रमों की समीक्षा में अहम भूमिका निभाती है।
देवेश कुमार ने भरोसा जताया कि विशेषज्ञों और अधिकारियों के सहयोग से पर्षद विकास के लक्ष्यों को गति देगी। इस अवसर पर योजना एवं विकास विभाग की अपर मुख्य सचिव डॉ. एन. विजयलक्ष्मी, सचिव कंवल तनुज, पर्षद के अपर सचिव श्याम बिहारी मीणा समेत कई वरीय प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे।





