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बत्तख पकड़ो प्रतियोगिता और टुसू गीतों की गूंज, टोटको नाला पर उमड़ा जनसैलाब

Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्र पटमदा प्रखंड स्थित लावा पंचायत के आदिवासी बहुल सिसदा गांव में मकर संक्रांति के अवसर पर टोटको नाला (छोटी नदी) के किनारे परंपरा, आस्था और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां आयोजित टुसू मेला, मुर्गा

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Jamshedpur News: पूर्वी सिंहभूम जिले के ग्रामीण क्षेत्र पटमदा प्रखंड स्थित लावा पंचायत के आदिवासी बहुल सिसदा गांव में मकर संक्रांति के अवसर पर टोटको नाला (छोटी नदी) के किनारे परंपरा, आस्था और रोमांच का अद्भुत संगम देखने को मिला। यहां आयोजित टुसू मेला, मुर्गा पाड़ा और विशेष रूप से बत्तख पकड़ने की अनोखी प्रतियोगिता ने हजारों लोगों को अपनी ओर आकर्षित किया। दोपहर से लेकर देर शाम तक चले इस मेले में दूर-दराज के गांवों से आए महिला-पुरुषों ने लोक संस्कृति का भरपूर आनंद उठाया।

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करीब सौ वर्ष पुराने इस मेले की पहचान पिछले छह दशकों से चली आ रही बत्तख पकड़ने की परंपरा से है, जो पूरे पटमदा और बोड़ाम क्षेत्र में अपने आप में अनोखी मानी जाती है। कमेटी सदस्य आह्लाद सिंह के अनुसार, इस परंपरा की शुरुआत गांव के स्वर्गीय सुरेन्द्र सिंह और भास्कर सिंह ने की थी। नदी किनारे शिवलिंग के रूप में पत्थलगढ़ी कर बाबा भोलेनाथ की पूजा के बाद पानी में बत्तख छोड़ी जाती है। उस बत्तख को पकड़ने वाली महिला को साड़ी, वस्त्र और नकद राशि देकर सम्मानित किया जाता है।

भीषण ठंड में बहते पानी में घंटों तक बत्तख पकड़ने की कोशिश करना आसान नहीं होता, लेकिन इसके बावजूद महिलाएं पूरे उत्साह और साहस के साथ प्रतियोगिता में उतरती हैं। कई बार तो एक ही महिला ने दो से तीन बत्तख पकड़कर अपनी तैराकी क्षमता का भी परिचय दिया। इस वर्ष 21 श्रद्धालुओं ने अपनी मन्नत पूरी होने पर बत्तख अर्पित की, जिन्हें पूजा के बाद नदी में छोड़ा गया।

मकर संक्रांति की सुबह पूजा की शुरुआत भूला निवासी पुरोहित शांतनु मुखर्जी ने वैदिक मंत्रोच्चार के साथ की, जबकि शाम तक लाया परंपरा के अनुसार पूजा-अर्चना चलती रही। वर्तमान में ग्राम प्रधान दोलगोविंद सिंह और कुड़ाम लाया अभिनय सिंह इस धार्मिक दायित्व का निर्वहन कर रहे हैं। शिवलिंग की स्थापना करने वाले भास्कर सिंह बताते हैं कि पहले जब क्षेत्र में अभाव और भूखमरी जैसी स्थिति थी, तब बाबा भोलेनाथ की आराधना इस कामना के साथ शुरू की गई थी कि गांवों में सुख, शांति और समृद्धि आए।

आज हालात बदले हैं। खेतों में लहलहाती फसलों के बाद गांव-गांव में मकर संक्रांति उल्लास के साथ मनाई जाती है। टुसू गीतों की गूंज के बीच टुसू देवी की आराधना होती है और सामूहिक उत्सव का स्वरूप देखने को मिलता है। इस वर्ष बत्तख पकड़ो प्रतियोगिता में पहला पुरस्कार गाड़ीग्राम की सुमित्रा टुडू को मिला। अन्य विजेताओं में गाड़ीग्राम की अंजली मुर्मू, राहला मुर्मू व आरती मुर्मू, सालबनी की अंजली मार्डी, फाल्गुनी मुर्मू व ललिता हेंब्रम, बड़डीह की पूर्णिमा बेसरा, सूरजमणि मुर्मू व सुनिया मुर्मू, महुलडीह की सुशीला सोरेन और गोबरघुसी की रीता सहिस शामिल रहीं।

मेले के सफल आयोजन में गांव के कालाचांद सिंह, आह्लाद सिंह, फूलचांद सिंह और गोपाल सिंह सहित अन्य ग्रामीणों का योगदान सराहनीय रहा। टोटको नाला का यह मेला न सिर्फ एक उत्सव है, बल्कि पीढ़ियों से चली आ रही उस परंपरा का जीवंत उदाहरण भी है, जिसमें आस्था, संस्कृति और सामूहिकता एक साथ बहती नजर आती है।

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