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गोत्र परंपरा तोड़ी तो समाज ने दिया ‘महादंड’, परिजनों ने किया मुंडन!

Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम जिले में आदिवासी ‘हो’ समाज की पारंपरिक मान्यताओं का एक अलग ही मामला चर्चा में है। लखीपाई गांव के युवक और पदमपुर गांव की युवती—दोनों ‘लागुरी’ गोत्र (किली) से संबंध रखते हैं—ने परंपरा के खिलाफ जाकर विवाह कर लिया। युवती के

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Chaibasa News: पश्चिमी सिंहभूम जिले में आदिवासी ‘हो’ समाज की पारंपरिक मान्यताओं का एक अलग ही मामला चर्चा में है। लखीपाई गांव के युवक और पदमपुर गांव की युवती—दोनों ‘लागुरी’ गोत्र (किली) से संबंध रखते हैं—ने परंपरा के खिलाफ जाकर विवाह कर लिया। युवती के गर्भवती होने पर मामला उजागर हुआ और दोनों गांवों में हड़कंप मच गया।

समाज ने सुनाया समाज बहिष्कार का फैसला

खबर मिलते ही समाज के मानकी-मुण्डा और युवा महासभा के पदाधिकारी मौके पर पहुंचे। मंगलवार को लखीपाई गांव में विशेष बैठक हुई जिसमें दोनों परिवारों ने बच्चों की गलती स्वीकार की। समाज ने परंपरा के अनुसार युवक-युवती को आजीवन बहिष्कृत करने का सर्वसम्मत फैसला सुनाया।

परंपरागत तिलक अनुष्ठान, सामूहिक क्षमा याचना

एक ही गोत्र में विवाह करने पर युवक-युवती को समाज ने किया बहिष्कृत

समाज ने गांव के शुद्धिकरण अनुष्ठान का आयोजन किया जिसमें बोंगा-बुरु परंपरा के तहत मुर्गा-बकरी की बलि दी गई। सामूहिक तौर पर समाज से क्षमा याचना की गई। परिवारों ने समाज की मर्यादा बनाए रखने और भविष्य में ऐसी गलती न दोहराने का संकल्प लेते हुए सार्वजनिक मुंडन किया। युवक-युवती बैठक से पहले ही गांव छोड़कर भाग गए थे।

‘हो’ समाज युवा महासभा के महासचिव ने लोगों से सामाजिक मर्यादा पालन की अपील की और युवाओं को जागरूक करने पर जोर दिया।

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