रांची: पर्यावरण संरक्षण, हरित विकास और झारखंड की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को सहेजने के उद्देश्य से रांची नगर निगम एक ऐतिहासिक कदम उठाने जा रहा है। निगम द्वारा पहली बार “सखुआ महोत्सव-2026” का आयोजन किया जाएगा। अगस्त माह से शुरू होकर अगले कुछ महीनों तक चलने वाला यह महाअभियान केवल वृक्षारोपण तक सीमित न रहकर एक व्यापक जनआंदोलन का रूप लेगा।
महोत्सव की सफलता और व्यापक जनसहभागिता तय करने के लिए 27 जुलाई 2026 को नगर निगम सभागार में महापौर रोशनी खलखो की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समीक्षा व परामर्श बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में शहर के सामाजिक, धार्मिक, शैक्षणिक, महिला समूहों और स्वयंसेवी संगठनों के प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया और अभियान को हर नागरिक तक पहुंचाने का संकल्प दोहराया।
चुटिया के ऐतिहासिक मंदिर से होगी शुरुआत
बैठक को संबोधित करते हुए महापौर रोशनी खलखो ने बताया कि सखुआ (साल) का वृक्ष झारखंड की पहचान, प्रकृति, आदिवासी परंपरा और जनआस्था का अटूट प्रतीक है। महोत्सव का औपचारिक शुभारंभ अगस्त माह में चुटिया स्थित ऐतिहासिक एवं धार्मिक स्थल इक्कीसो महादेव मंदिर परिसर से किया जाएगा। इसके बाद शहर के विभिन्न वार्डों, स्कूलों, कॉलेजों, सरकारी व गैर-सरकारी परिसरों, पार्कों और सार्वजनिक सड़कों के किनारे चरणबद्ध तरीके से सखुआ के पौधे लगाए जाएंगे।
गेबियन से मिलेगी सुरक्षा, नियमित होगी निगरानी
अभियान की सबसे बड़ी विशेषता पौधों की उत्तरजीविता (Survival) सुनिश्चित करना है। महापौर ने स्पष्ट किया कि केवल पौधा लगाना ही मकसद नहीं है, बल्कि उसका संरक्षण भी उतना ही जरूरी है। इसलिए, रोपे गए हर पौधे को मवेशियों व बाहरी नुकसान से बचाने के लिए गेबियन (संरक्षण जाली) से घेरा जाएगा। साथ ही, नगर निगम की टीमें नियमित रूप से पौधों की देखभाल और निगरानी करेंगी ताकि यह अभियान औपचारिक न रहकर दूरगामी परिणाम दे सके।
नागरिकों से एक पौधा लगाने की अपील
उप महापौर नीरज कुमार ने अभियान को आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और संतुलित पर्यावरण की सौगात बताया। उन्होंने कहा कि पर्यावरण सुरक्षा हर नागरिक का नैतिक दायित्व है। बैठक में उपस्थित विभिन्न संगठनों के प्रतिनिधियों ने वार्ड स्तर पर जागरूकता कार्यक्रम चलाने और पौधों की देखरेख की जिम्मेदारी उठाने का आश्वासन दिया।
रांची नगर निगम का लक्ष्य सखुआ महोत्सव के जरिए शहर में जैव विविधता को बढ़ावा देना, जलवायु परिवर्तन के खतरों को कम करना और रांची को देश के सबसे हरित शहरों की श्रेणी में खड़ा करना है।

गेबियन से मिलेगी सुरक्षा, नियमित होगी निगरानी


