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धोनी और सलिमा टेटे का जिक्र कर बोले राज्यपाल- “खेल ही है असली जीवन”

Dhanbad News: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार शनिवार को धनबाद जिले के टुंडी स्थित रतनपुर पहुंचे। अवसर था सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित प्रांतीय खेलकूद प्रतियोगिता का समापन समारोह। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए नन्हे खिलाड़ियों के बीच राज्यपाल ने न केवल पुरस्कार

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Dhanbad News: झारखंड के राज्यपाल संतोष कुमार गंगवार शनिवार को धनबाद जिले के टुंडी स्थित रतनपुर पहुंचे। अवसर था सरस्वती विद्या मंदिर में आयोजित प्रांतीय खेलकूद प्रतियोगिता का समापन समारोह। प्रदेश के विभिन्न अंचलों से आए नन्हे खिलाड़ियों के बीच राज्यपाल ने न केवल पुरस्कार बांटे, बल्कि अपने संबोधन से उनमें जोश भी भर दिया। उन्होंने स्पष्ट कहा कि खेल केवल पदक जीतने का जरिया नहीं है, बल्कि यह जीवन जीने की कला और अनुशासन सिखाने का सबसे सशक्त माध्यम है।

हार को सहजता से स्वीकार करना ही असली खेल भावना

समारोह को संबोधित करते हुए राज्यपाल महोदय ने कहा कि बचपन में खेलों के प्रति रुचि पैदा करना एक स्वस्थ समाज की नींव है। उन्होंने बच्चों को प्रेरित करते हुए कहा, “खेल हमें सिखाते हैं कि हार को सहजता से कैसे स्वीकार करें और जीत में विनम्र कैसे रहें।” विद्या भारती और विद्या विकास समिति द्वारा जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों में शिक्षा के साथ-साथ संस्कारों के संवर्धन के लिए किए जा रहे कार्यों की उन्होंने मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उन्होंने खुशी जाहिर की कि वनवासी क्षेत्रों के बच्चे आज अपनी प्रतिभा के दम पर मुख्यधारा में प्रगति कर रहे हैं।

धोनी से लेकर सलिमा टेटे तक: झारखंड की खेल विरासत का गुणगान

राज्यपाल ने झारखंड की गौरवशाली खेल परंपरा को याद करते हुए महेंद्र सिंह धोनी, दीपिका कुमारी और पूर्णिमा महतो जैसे दिग्गजों का उदाहरण दिया। उन्होंने विशेष रूप से भारतीय महिला हॉकी टीम की कप्तान सलिमा टेटे और खिलाड़ी निक्की प्रधान का जिक्र करते हुए कहा कि झारखंड आज ‘लैंड ऑफ आर्चरी’ और ‘हॉकी की नर्सरी’ के रूप में विश्व विख्यात है। उन्होंने विश्वास जताया कि टुंडी जैसे अंचलों से निकले ये बच्चे भविष्य में अंतरराष्ट्रीय मंचों पर तिरंगा लहराएंगे।

पीएम की ‘राष्ट्रीय खेल नीति–2025’ और भविष्य का रोडमैप

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के ‘खेलो इंडिया’ अभियान और हाल ही में घोषित ‘राष्ट्रीय खेल नीति–2025’ पर चर्चा करते हुए राज्यपाल ने कहा कि भारत अब एक वैश्विक खेल महाशक्ति बनने की ओर अग्रसर है। उन्होंने जोर दिया कि विद्यालय स्तर पर ही बच्चों को सही प्रशिक्षण और अवसर मिलने चाहिए। 18 दिसंबर से शुरू हुई इस प्रतियोगिता में करीब 500 प्रतिभागियों की भागीदारी ने यह साबित कर दिया कि झारखंड की मिट्टी में संघर्ष और समर्पण कूट-कूट कर भरा है।

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