New Delhi: प्रोस्टेट कैंसर पुरुषों में होने वाले सबसे आम कैंसर में से एक है। अब तक इसके इलाज के लिए मुख्य रूप से सर्जरी और रेडियोथेरेपी का सहारा लिया जाता रहा है। हालांकि, इन पारंपारिक उपचारों के कारण कई बार पेशाब पर नियंत्रण खोने या यौन स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याएं सामने आ जाती हैं। ऐसे में एक नई तकनीक ‘फोकल थेरेपी’ ने डॉक्टरों और मरीजों का ध्यान अपनी ओर खींचा है।
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ब्रिटेन के अध्ययन में हुआ बड़ा खुलासा
ब्रिटेन की नेशनल हेल्थ सर्विस (NHS) के तहत करीब 10 साल तक चले एक बड़े क्लिनिकल अध्ययन में लगभग 3,500 प्रोस्टेट कैंसर मरीजों के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया। रिसर्च से सामने आया कि सही मरीजों में फोकल थेरेपी कैंसर को नियंत्रित करने में सर्जरी और रेडियोथेरेपी जितनी ही असरदार है। विशेषज्ञ इस तकनीक को प्रोस्टेट कैंसर के इलाज में एक बड़ा और महत्वपूर्ण कदम मान रहे हैं।
कैसे काम करती है फोकल थेरेपी?
फोकल थेरेपी प्रोस्टेट कैंसर के इलाज का एक आधुनिक और कम इनवेसिव (Non-Invasive) तरीका है। इसमें पूरे प्रोस्टेट ग्लैंड को हटाने या पूरे हिस्से पर रेडिएशन देने के बजाय डॉक्टर केवल उसी छोटे हिस्से का इलाज करते हैं, जहाँ कैंसर मौजूद होता है। इसके तहत कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करने के लिए हाई-इंटेंसिटी फोकस्ड अल्ट्रासाउंड (HIFU) या क्रायोथेरेपी जैसी तकनीकों का इस्तेमाल किया जाता है। इलाज सिर्फ प्रभावित हिस्से तक सीमित रहने के कारण आसपास के स्वस्थ ऊतकों को नुकसान नहीं पहुँचता है।
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किसे मिलेगा इस तकनीक का फायदा?
शोधकर्ताओं के अनुसार, फोकल थेरेपी से मरीजों में यूरिन लीक और अन्य दुष्परिणाम काफी कम देखे गए हैं। विशेषज्ञों ने इन नतीजों को बेहद उत्साहजनक बताया है। हालांकि, डॉक्टरों का स्पष्ट कहना है कि यह थेरेपी हर मरीज के लिए उपयुक्त नहीं है। यह मुख्य रूप से उन मरीजों के लिए बेहतर विकल्प है, जिनका कैंसर केवल प्रोस्टेट ग्लैंड तक ही सीमित (Localized) हो। यदि कैंसर शरीर के अन्य हिस्सों में फैल चुका है, तो इलाज की रणनीति अलग हो सकती है।




