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प्रह्लाद जोशी ने संभाला शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार, पहले दिन अधिकारियों संग की बैठक

केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने शिक्षा मंत्रालय का कार्यभार संभालने के बाद वरिष्ठ अधिकारियों के साथ पहली उच्चस्तरीय बैठक की। उन्हें ऐसे समय यह जिम्मेदारी मिली है, जब परीक्षा प्रणाली, राष्ट्रीय शिक्षा नीति और शिक्षा सुधारों को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है।

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New Delhi: केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने रविवार को केंद्रीय शिक्षा मंत्री के रूप में कार्यभार संभाल लिया। पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद उन्होंने शिक्षा मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों के साथ उच्चस्तरीय बैठक कर मंत्रालय के कामकाज की समीक्षा की। उन्हें ऐसे समय यह जिम्मेदारी मिली है, जब देश में शिक्षा व्यवस्था, प्रतियोगी परीक्षाओं की पारदर्शिता और राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के प्रभावी क्रियान्वयन को लेकर व्यापक चर्चा चल रही है।

कैसे मिली शिक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी?

राष्ट्रपति द्वारा पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का इस्तीफा स्वीकार किए जाने के बाद प्रधानमंत्री की सलाह पर प्रह्लाद जोशी को शिक्षा मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार सौंपा गया है। कार्यभार संभालने के बाद उन्होंने मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारियों से विभिन्न विषयों पर चर्चा की।

प्रह्लाद जोशी का राजनीतिक अनुभव

प्रह्लाद जोशी केंद्र सरकार के वरिष्ठ मंत्रियों में शामिल हैं। वह पहले से उपभोक्ता मामले, खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण तथा नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। इससे पहले वे संसदीय कार्य, कोयला और खान मंत्रालय जैसे अहम विभागों का भी नेतृत्व कर चुके हैं।

कर्नाटक की धारवाड़ लोकसभा सीट से लगातार पांच बार सांसद चुने जा चुके जोशी को अनुभवी संसदीय रणनीतिकार और संगठनात्मक क्षमता वाले नेता के रूप में जाना जाता है।

शिक्षा मंत्री के सामने प्रमुख चुनौतियां

प्रह्लाद जोशी के सामने परीक्षा प्रणाली में लोगों का विश्वास मजबूत करना, प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना और राष्ट्रीय शिक्षा नीति के तहत चल रहे सुधारों को गति देना प्रमुख चुनौतियों में शामिल है।

इसके अलावा विद्यालयी शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार, उच्च शिक्षा संस्थानों में अनुसंधान को बढ़ावा, डिजिटल शिक्षा का विस्तार और कौशल आधारित शिक्षा को मजबूत करना भी महत्वपूर्ण प्राथमिकताओं में माना जा रहा है।

आगे क्या होगा?

कार्यभार संभालने के साथ ही मंत्रालय में प्रारंभिक समीक्षा बैठकों का दौर शुरू हो गया है। माना जा रहा है कि आने वाले समय में परीक्षा सुधार, तकनीक आधारित मूल्यांकन प्रणाली, विश्वविद्यालयों में अनुसंधान और छात्रों से जुड़े लंबित मुद्दों पर मंत्रालय तेजी से निर्णय लेने की दिशा में काम कर सकता है।

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