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प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने के आदेश का इंतजार, पुलिस ने कही यह बात

20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद दर्ज 15 FIR को लेकर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। दिल्ली पुलिस का कहना है कि मुकदमे वापस लेने संबंधी कोई आधिकारिक आदेश नहीं मिला है और आगे की कार्रवाई सरकार के निर्देश मिलने के बाद ही की जाएगी।

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New Delhi: 20 जुलाई के प्रदर्शन के बाद प्रदर्शनकारियों पर दर्ज FIR वापस लेने के मुद्दे पर अभी स्थिति स्पष्ट नहीं हो सकी है। प्रदर्शन का नेतृत्व कर रहे संगठन की प्रमुख मांगों में मुकदमे वापस लेना भी शामिल था। सरकार के साथ हुई बातचीत में इस विषय पर चर्चा हुई थी, लेकिन दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसे अब तक इस संबंध में कोई आधिकारिक निर्देश प्राप्त नहीं हुआ है। इसलिए सभी मामलों में जांच नियमानुसार जारी है।

पुलिस ने क्या कहा?

दिल्ली पुलिस के अधिकारियों के अनुसार, 20 जुलाई को हुए प्रदर्शन के बाद 22 जुलाई को कुल 15 FIR दर्ज की गई थीं। उनका कहना है कि किसी भी FIR को सीधे समाप्त नहीं किया जाता। इसके लिए निर्धारित कानूनी प्रक्रिया अपनाई जाती है। जांच पूरी होने के बाद आरोपपत्र दाखिल किया जा सकता है, पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर क्लोजर रिपोर्ट लगाई जा सकती है या सरकार अभियोजन वापस लेने का निर्णय ले सकती है।

यदि सरकार मुकदमा वापस लेने का फैसला करती है, तो संबंधित मामलों में आगे की जांच और अभियोजन की प्रक्रिया उसी के अनुरूप आगे बढ़ेगी।

प्रदर्शनकारी संगठन का क्या दावा है?

प्रदर्शनकारी संगठन का दावा है कि सरकार ने FIR वापस लेने को लेकर लिखित आश्वासन दिया है। हालांकि दिल्ली पुलिस का कहना है कि उसके पास अभी तक ऐसा कोई आधिकारिक आदेश नहीं पहुंचा है। इसलिए फिलहाल सभी मामलों में जांच जारी है और आगे का निर्णय सरकार के निर्देशों के आधार पर लिया जाएगा।

जांच में अब तक क्या सामने आया?

पुलिस के मुताबिक, 20 जुलाई के प्रदर्शन के दौरान कानून-व्यवस्था प्रभावित हुई थी। अधिकारियों का दावा है कि इस दौरान 129 पुलिसकर्मी और 60 प्रदर्शनकारी घायल हुए, जबकि घायलों में 11 अधिकारी भी शामिल हैं।

एक मामले में हत्या के प्रयास, दंगा, गैरकानूनी जमावड़ा, लोक सेवकों पर हमला, सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाने समेत विभिन्न धाराओं में मामला दर्ज किया गया है। जांच एजेंसियों ने 15 टेराबाइट से अधिक वीडियो फुटेज एकत्र किए हैं, जिनकी जांच की जा रही है। शुरुआती जांच में सोशल मीडिया के जरिए प्रदर्शन के आयोजन और भीड़ जुटाने की भूमिका की भी पड़ताल की जा रही है।

पुलिस का कहना है कि खुफिया जानकारी के आधार पर जंतर-मंतर पर बड़ी संख्या में लोगों के जुटने की आशंका थी, लेकिन संसद मार्च के दौरान अनुमान से अधिक भीड़ पहुंच गई। फिलहाल सभी मामलों की जांच जारी है और सरकार के अगले निर्देशों का इंतजार किया जा रहा है।

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