Paris: यूरोप के कई देशों में महंगाई, कम वेतन, बजट की कमी और सरकारी नीतियों के खिलाफ लोगों का गुस्सा सड़कों पर दिखाई दे रहा है। फ्रांस, इटली और अल्बानिया में प्रदर्शन उग्र हो गए। कई जगह पुलिस और प्रदर्शनकारियों के बीच झड़पें हुईं, जबकि आगजनी और लूटपाट की घटनाएं भी सामने आईं। फ्रांस में पुलिस ने 1,314 लोगों को गिरफ्तार किया। वहीं, अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शनकारियों और पुलिस के बीच टकराव हुआ।
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फ्रांस में प्रदर्शन के दौरान 1,314 लोग गिरफ्तार
फ्रांस के गृह मंत्रालय के अनुसार, देशभर में हुए प्रदर्शनों और हिंसक झड़पों के दौरान पुलिस ने 1,314 लोगों को गिरफ्तार किया। इन घटनाओं में 53 पुलिस अधिकारी घायल हुए। इसके अलावा 75 स्थानों पर आगजनी और 24 दुकानों में लूटपाट की घटनाएं दर्ज की गईं।
पेरिस, मार्सिले, ल्योन और बोर्डो समेत कई शहरों में दंगा-रोधी पुलिस ने प्रदर्शनकारियों को नियंत्रित करने के लिए आंसू गैस और वाटर कैनन का इस्तेमाल किया। सुरक्षा व्यवस्था बनाए रखने के लिए कई स्थानों पर नाकेबंदी भी की गई।
फ्रांस के गृह मंत्री लॉरेंट नुनेज के मुताबिक, प्रदर्शनों में चार लाख से अधिक लोगों ने हिस्सा लिया। हालांकि, आयोजकों ने प्रदर्शनकारियों की संख्या आठ लाख से ज्यादा होने का दावा किया। दोनों आंकड़ों में अंतर को देखते हुए प्रदर्शन में शामिल लोगों की वास्तविक संख्या को लेकर अलग-अलग दावे सामने आए।
इटली के आठ शहरों में सड़कों पर उतरे छात्र और युवा
इटली में भी सरकार की नीतियों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हुए। राजधानी रोम समेत आठ शहरों में हजारों लोग सड़कों पर उतरे। प्रदर्शनों में छात्रों और युवाओं की भागीदारी रही।
शनिवार रात मिलान में प्रदर्शन शांतिपूर्ण रहा, लेकिन रोम और ट्यूरिन में पुलिस के साथ झड़पें हुईं। हिंसा और लूटपाट जैसी घटनाओं को रोकने के लिए पुलिस के साथ सैनिकों को भी तैनात किया गया।
रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने इन घटनाओं के सिलसिले में नौ लोगों को गिरफ्तार किया, जबकि 371 लोगों को हिरासत में लिया गया। इन कार्रवाइयों के बीच सरकारी नीतियों और आर्थिक परिस्थितियों को लेकर असंतोष चर्चा में रहा।
अल्बानिया में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग पर हिंसा
अल्बानिया की राजधानी तिराना में प्रधानमंत्री एडी रामा के इस्तीफे की मांग को लेकर प्रदर्शन तेज हो गए। हिंसा रोकने के लिए नए नियमों की घोषणा के कुछ ही घंटों बाद रविवार को फिर से टकराव की स्थिति पैदा हो गई।
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प्रदर्शनकारियों ने पुलिस पर पथराव किया। प्रधानमंत्री कार्यालय के बाहर बातचीत के लिए रखी गई कुर्सियों और अन्य सामान को भी आग के हवाले कर दिया गया। पुलिस ने मामले में कई लोगों को हिरासत में लिया है।
तिराना में हुई घटनाओं ने सरकार के सामने कानून-व्यवस्था बनाए रखने की चुनौती बढ़ा दी है। हालांकि, प्रदर्शन के पीछे उठाए गए सभी मुद्दों और उनकी अलग-अलग वजहों की विस्तृत जानकारी उपलब्ध सामग्री में नहीं दी गई है।
फ्रांस की आव्रजन नीति पर ट्रंप ने उठाए सवाल
यूरोप में विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस की आव्रजन नीति की आलोचना की। उन्होंने दावा किया कि फ्रांस इसलिए जल रहा है, क्योंकि उसने ऐसे लोगों के लिए अपने दरवाजे खोल दिए हैं जो उससे नफरत करते हैं।
ट्रंप की यह टिप्पणी फ्रांस में आव्रजन और सुरक्षा को लेकर जारी राजनीतिक बहस के बीच आई। हालांकि, फ्रांस, इटली और अल्बानिया में हुए प्रदर्शनों के कारण एक जैसे नहीं हैं। फ्रांस और इटली में आर्थिक तथा सरकारी नीतियों को लेकर विरोध की खबरें आईं, जबकि अल्बानिया में प्रधानमंत्री के इस्तीफे की मांग प्रमुख रही।
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इन घटनाओं ने यूरोप में आर्थिक असंतोष, सरकारी नीतियों, आव्रजन और राजनीतिक जवाबदेही से जुड़े मुद्दों को फिर चर्चा के केंद्र में ला दिया है।





