रांची : झारखंड हाईकोर्ट ने तलाक के बाद पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण से जुड़े मामले में महत्वपूर्ण टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि शादी का रिश्ता खत्म होने के बाद भी पति अपनी कानूनी जिम्मेदारियों से पूरी तरह पीछे नहीं हट सकता। तलाक के बावजूद पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण की जिम्मेदारी कानून के अनुसार बनी रह सकती है।
तलाक से सभी जिम्मेदारियां नहीं होतीं खत्म
तलाक के बाद पत्नी और बच्चों की देखभाल तथा उनके खर्च को लेकर कई बार विवाद होता है। ऐसे मामलों में अदालत दोनों पक्षों की स्थिति को ध्यान में रखकर फैसला करती है।
हाईकोर्ट की टिप्पणी से यह बात सामने आई है कि केवल तलाक हो जाने से पति की सभी कानूनी जिम्मेदारियां अपने आप खत्म नहीं हो जाती हैं। पत्नी और बच्चों के भरण-पोषण का सवाल लागू कानून और मामले की परिस्थितियों पर निर्भर करता है।
आर्थिक स्थिति और साक्ष्यों के आधार पर होता है फैसला
भरण-पोषण से जुड़े मामलों में अदालत पति-पत्नी की आर्थिक स्थिति, बच्चों की जरूरतों और अन्य जरूरी तथ्यों पर विचार करती है। इसके बाद तय किया जाता है कि किसे भरण-पोषण मिल सकता है और कितनी राशि दी जानी चाहिए।
हालांकि, इस मामले में हाईकोर्ट ने क्या विशेष आदेश दिया है और भरण-पोषण की कितनी राशि तय की गई है, इसकी पूरी जानकारी उपलब्ध नहीं है। विस्तृत न्यायिक आदेश सामने आने के बाद ही मामले की अन्य बातें स्पष्ट हो सकेंगी।



