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Palamu: पलामू जिले में झोलाछाप डॉक्टरों की कथित लापरवाही से दो अलग-अलग घटनाओं में एक नवजात और 12 वर्षीय बच्ची की मौत हो गई। दोनों मामलों के सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग और पुलिस प्रशासन सक्रिय हो गया है। एक मामले में निजी नर्सिंग होम को सील कर दिया गया है, जबकि दूसरे मामले में परिजनों के आवेदन मिलने के बाद कानूनी कार्रवाई की बात कही गई है।
इन दोनों घटनाओं ने जिले में अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप डॉक्टरों की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मामले की जांच शुरू कर दी है।
प्रसव के दौरान नवजात की मौत, निजी नर्सिंग होम सील
पहली घटना लेस्लीगंज थाना क्षेत्र के ढेला स्थित एक निजी नर्सिंग होम की है। यहां प्रसव के लिए भर्ती कराई गई एक महिला के नवजात की इलाज में कथित लापरवाही के कारण मौत हो गई।
मामले की शिकायत मिलने के बाद स्वास्थ्य विभाग की टीम ने जांच की। जांच के दौरान कई अनियमितताएं सामने आईं। विभाग के अनुसार, अस्पताल के बोर्ड पर जिन डॉक्टरों के नाम दर्ज थे, वे वहां कार्यरत नहीं पाए गए। इसके अलावा जिस डॉक्टर के नाम पर ऑपरेशन किए जाने का दावा किया गया, वह घटना के समय अस्पताल में मौजूद ही नहीं थे।
जांच के बाद स्वास्थ्य विभाग ने संबंधित निजी नर्सिंग होम को तत्काल प्रभाव से सील कर दिया। सिविल सर्जन डॉ. अनिल कुमार श्रीवास्तव ने बताया कि नर्सिंग होम संचालक के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाएगी।
गलत इंजेक्शन लगाने के आरोप के बाद बच्ची की मौत
दूसरी घटना चैनपुर थाना क्षेत्र के पतरिया गांव की है। यहां 12 वर्षीय विपाशा कुमारी फोड़ा-फुंसी का इलाज कराने एक कथित झोलाछाप डॉक्टर के पास गई थी। आरोप है कि इलाज के दौरान गलत इंजेक्शन लगाए जाने के बाद उसकी तबीयत अचानक बिगड़ गई।
परिजन उसे अस्पताल ले जाने की तैयारी कर रहे थे, लेकिन रास्ते में ही उसकी मौत हो गई। घटना के बाद परिवार में मातम छा गया।
चैनपुर थाना प्रभारी ने बताया कि परिजनों की ओर से आवेदन मिलने के बाद मामले में नियमानुसार कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप डॉक्टरों पर उठे सवाल
लगातार सामने आई इन दोनों घटनाओं ने जिले में संचालित अवैध नर्सिंग होम और झोलाछाप डॉक्टरों के खिलाफ स्वास्थ्य विभाग की निगरानी और कार्रवाई पर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय लोगों ने ऐसे अवैध चिकित्सा केंद्रों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है, ताकि भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
स्वास्थ्य विभाग ने संकेत दिए हैं कि जिले में संचालित निजी नर्सिंग होम और क्लीनिकों की जांच अभियान को और तेज किया जाएगा।

