रांची: रंगीन मछलियों के पालन और एक्वेरियम निर्माण के क्षेत्र में स्वरोजगार तलाश रहे युवाओं व मत्स्य पालकों के लिए एक बेहतरीन अवसर सामने आया है। रांची जिला अंतर्गत मत्स्य अनुसंधान केन्द्र, शालीमार द्वारा “मत्स्य प्रसार, अनुसंधान एवं प्रशिक्षण योजना” के तहत नई रंगीन मछली पालन इकाइयों की स्थापना के लिए आवेदन आमंत्रित किए गए हैं। इच्छुक मत्स्य पालक आगामी 7 नवंबर 2026 तक कार्यालय अवधि में अपना आवेदन जमा कर सकते हैं।
प्रति इकाई 20 हजार रुपये की मिलेगी पूरक सामग्री
इस योजना के अंतर्गत चयनित लाभुकों को रंगीन मछली पालन शुरू करने के लिए प्रति इकाई 20 हजार रुपये मूल्य की पूरक सामग्री (जिसमें रंगीन मछली भी शामिल है) उपलब्ध कराई जाएगी। वित्तीय वर्ष 2026–27 के निर्धारित भौतिक एवं वित्तीय लक्ष्य के आलोक में जिले भर में कुल 45 इकाइयों को लाभान्वित करने का लक्ष्य रखा गया है। विभिन्न शीर्षों के तहत इसका वर्गीकरण किया गया है, जिसमें शीर्ष 101 के तहत 25, शीर्ष 796 के तहत 10 और शीर्ष 789 के तहत 10 इकाइयां शामिल हैं।
किन्हें मिलेगी चयन में प्राथमिकता?
मत्स्य अनुसंधान केंद्र के अनुसार, योजना का लाभ पारदर्शी और प्रभावी तरीके से जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए कुछ आवश्यक मानक तय किए गए हैं:
- वित्तीय वर्ष 2026–27 में रंगीन मछली पालन का विधिवत प्रशिक्षण ले चुके आवेदकों को चयन में पहली प्राथमिकता दी जाएगी।
- व्यक्तिगत स्तर के साथ-साथ समूह (क्लस्टर) में आवेदन करने वालों को भी तरजीह मिलेगी, जिससे ग्रामीण या शहरी स्तर पर सामूहिक स्वरोजगार को बढ़ावा मिल सके।
- इसके अलावा आवेदक के पास कार्य स्थल की समुचित उपलब्धता, निरंतर बिजली तथा स्वच्छ पानी की उचित व्यवस्था का होना अनिवार्य है, ताकि मछलियों का रख-रखाव सुचारू रूप से हो सके।
आवेदन पत्र कहां से प्राप्त करें?
योजना से संबंधित विहित आवेदन प्रपत्र मत्स्य अनुसंधान केन्द्र, शालीमार (धुर्वा), रांची के कार्यालय से किसी भी कार्य दिवस में व्यक्तिगत रूप से जाकर प्राप्त किया जा सकता है। अधिकारियों का मानना है कि आज के दौर में घरों, कार्यालयों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों में एक्वेरियम रखने का चलन तेजी से बढ़ा है, जिससे रंगीन मछलियों की मांग में भारी इजाफा हुआ है। ऐसे में यह सरकारी सहायता न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार के नए अवसर पैदा करेगी, बल्कि मत्स्य पालकों की आय बढ़ाने में भी मील का पत्थर साबित होगी।





