रांची: झारखंड में जमीनी स्तर पर बाल विकास और महिला सशक्तिकरण की रीढ़ माने जाने वाले नवनियुक्त बाल विकास परियोजना पदाधिकारियों (CDPOs) ने गुरुवार को रांची इंस्टीट्यूट ऑफ न्यूरो-साइकियाट्री एंड एलाइड साइंसेज (रिनपास), कांके का शैक्षणिक व परिचयात्मक दौरा किया। इस विशेष भ्रमण का मुख्य मकसद इन युवा प्रशासनिक अधिकारियों को मानसिक स्वास्थ्य, बाल मनोविज्ञान, नशा मुक्ति और मनोसामाजिक पुनर्वास जैसी गंभीर चुनौतियों की व्यावहारिक समझ से रूबरू कराना था, ताकि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में बेहतर प्रभाव छोड़ सकें।
दौरे के दौरान अधिकारियों ने अस्पताल के विभिन्न वार्डों, विशेष ओपीडी, पुनर्वास केंद्रों और परामर्श इकाइयों का बारीकी से निरीक्षण किया। उन्होंने जाना कि मानसिक बीमारियों से जूझ रहे लोगों का न केवल क्लिनिकल उपचार किया जाता है, बल्कि उन्हें समाज की मुख्यधारा से जोड़ने के लिए किस तरह हुनर सिखाकर मनोसामाजिक पुनर्वास दिया जाता है।
रिनपास के वरिष्ठ मनोरोग विशेषज्ञों और मनोवैज्ञानिकों ने अधिकारियों के साथ एक विस्तृत संवाद सत्र आयोजित किया। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि आंगनबाड़ी और ग्रामीण स्तर पर काम करते हुए CDPOs बच्चों और किशोरों में होने वाले व्यवहारगत बदलावों को सबसे पहले भांप सकते हैं। उन्होंने बताया कि अक्सर बच्चों में चिड़चिड़ापन, पढ़ाई में अचानक गिरावट, अत्यधिक गुस्सा, गुमसुम रहना या असामाजिक व्यवहार सामान्य आदत न होकर किसी गहरे मानसिक तनाव या विकार का संकेत हो सकता है। यदि ऐसे मामलों की पहचान शुरुआती दौर में ही कर ली जाए, तो गंभीर मानसिक जटिलताओं से बच्चों को आसानी से बचाया जा सकता है।
सत्र में नशा मुक्ति के उपायों और किशोरों में बढ़ते नशे के रुझान पर भी गंभीर विमर्श हुआ। अधिकारियों को प्रशिक्षित किया गया कि वे किस प्रकार सुदूर ग्रामीण इलाकों में अंधविश्वास और मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े सामाजिक कलंक (स्टिग्मा) को तोड़कर लोगों को झाड़-फूंक के बजाय आधुनिक चिकित्सा से जोड़ने के लिए प्रेरित करें। समय पर मरीज को सही स्वास्थ्य केंद्र या रिनपास जैसी विशेषज्ञ संस्था तक पहुंचाना ही कई जिंदगियों को बचा सकता है।
भ्रमण के दौरान अंतर-विभागीय समन्वय पर विशेष जोर दिया गया। अधिकारियों ने चर्चा की कि समाज कल्याण विभाग और स्वास्थ्य विभाग मिलकर किस तरह पंचायत स्तर पर मानसिक स्वास्थ्य परामर्श शिविर और जागरूकता अभियान चला सकते हैं।
रिनपास प्रशासन ने इस पहल का स्वागत करते हुए कहा कि बाल विकास परियोजना पदाधिकारी सीधे तौर पर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के संपर्क में रहते हैं। ऐसे में यदि वे मानसिक स्वास्थ्य के प्रति संवेदनशील और जागरूक रहेंगे, तो इसका सीधा लाभ राज्य के लाखों परिवारों और बच्चों तक पहुंचेगा। प्रशासन के अनुसार, ऐसे शैक्षणिक भ्रमण नीति-निर्माताओं और सेवा प्रदाताओं के बीच की दूरी को पाटते हैं।
कार्यक्रम के समापन पर नवनियुक्त अधिकारियों ने रिनपास द्वारा दी जा रही आधुनिक उपचार और मानवीय पुनर्वास सेवाओं की सराहना की। अधिकारियों ने भरोसा दिलाया कि वे अपने क्षेत्रों में जाकर आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं को इस दिशा में सजग करेंगे और आवश्यकता पड़ने पर मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं के साथ त्वरित समन्वय स्थापित करेंगे।





