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एक बार फिर पलटे Trump! ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर बदला बयान

World News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) एक बार फिर अपने बयानों के लिए सुर्खियों में हैं। इस बार मामला है ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर उनके लगातार बदलते रुख का। हाल के कुछ दिनों में ट्रंप (Trump) ने तीन बार इस

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World News: अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) एक बार फिर अपने बयानों के लिए सुर्खियों में हैं। इस बार मामला है ईरान में सत्ता परिवर्तन को लेकर उनके लगातार बदलते रुख का। हाल के कुछ दिनों में ट्रंप (Trump) ने तीन बार इस मुद्दे पर अपना पक्ष बदला है। कभी वे शासन परिवर्तन की बात करते हैं, तो कभी उससे साफ इनकार कर देते हैं। ताज़ा बयान में ट्रंप (Trump) ने कहा है कि ईरान की सत्ता बदलना अमेरिका का उद्देश्य नहीं है

ट्रंप (Trump) ने एक मीडिया इंटरव्यू में कहा, “नहीं… अगर ऐसा कुछ था भी, तो अब नहीं है। मैं चाहता हूं कि चीजें जल्द से जल्द शांत हों। शासन परिवर्तन अक्सर अराजकता लाता है, और हम इतनी अराजकता नहीं देखना चाहते।” उनका यह बयान उस वक्त आया जब हाल ही में उन्होंने खुद सोशल मीडिया पर शासन परिवर्तन की संभावना जताई थी।

दरअसल, बीते रविवार को ट्रंप (Trump) ने एक्स (पूर्व में ट्विटर) पर एक पोस्ट में लिखा था, “अगर मौजूदा ईरानी शासन ईरान को फिर से महान नहीं बना सकता, तो शासन परिवर्तन क्यों न हो?” इस बयान ने अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में हलचल मचा दी थी, क्योंकि यह सीधे ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप जैसा माना गया।

ट्रंप (Trump) ने यह भी कहा कि अमेरिका यह सुनिश्चित करेगा कि ईरान को कभी भी परमाणु हथियार ना मिलें। उन्होंने ईरान को एक महान व्यापारिक राष्ट्र के रूप में देखे जाने की इच्छा जताई। यह बयान तब आया जब ईरान और इजराइल के बीच हालिया संघर्ष के बाद युद्धविराम की घोषणा हुई थी।

ट्रंप (Trump) ने अपनी सोशल मीडिया साइट ट्रुथ सोशल पर पोस्ट करते हुए कहा कि ईरान और इजराइल दोनों ही युद्ध नहीं चाहते थे। उन्होंने दावा किया कि “यह मेरे लिए गर्व की बात थी कि मैंने सभी परमाणु ठिकानों को नष्ट किया और फिर युद्ध रोक दिया।” ट्रंप (Trump) ने इजराइल की ओर से हमले रोकने के फैसले को सराहा और कहा कि उनके पास जेट तैयार थे लेकिन उन्होंने हमला नहीं किया। “यह एक बड़ा फैसला था, जिसके लिए हम आभारी हैं,” उन्होंने कहा।

हालांकि, सोमवार को ट्रंप (Trump) ने आधिकारिक रूप से यह कहा था कि दोनों देशों के बीच सीजफायर पर सहमति बन गई है। लेकिन कुछ ही घंटों बाद इजराइल ने ईरान पर संघर्षविराम तोड़ने का आरोप लगाया। इस घटनाक्रम से साफ है कि क्षेत्र में तनाव अभी भी पूरी तरह खत्म नहीं हुआ है।

ट्रंप (Trump) के इन बयानों का असर सिर्फ पश्चिम एशिया तक सीमित नहीं है, बल्कि अमेरिकी चुनावी राजनीति पर भी असर डाल सकता है। विश्लेषकों का मानना है कि ट्रंप (Trump) अपने पुराने वादों को याद दिलाकर 2024 के राष्ट्रपति चुनाव में फिर से सक्रिय भूमिका निभाना चाहते हैं।

ईरान के परमाणु ठिकानों पर अमेरिका के हालिया हमले के बाद शांति प्रक्रिया शुरू हुई थी। ट्रंप (Trump) ने अपनी टीम को स्पष्ट निर्देश दिया कि अब प्राथमिकता “स्थायी शांति स्थापित करना” होनी चाहिए। हालांकि उनके बयान और सोशल मीडिया पोस्ट से भ्रम की स्थिति बनी हुई है।

राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि ट्रंप (Trump) की बयानबाज़ी में स्पष्टता की कमी है और यह रणनीतिक उलझाव कई देशों की विदेश नीति पर असर डाल सकता है। खासकर ईरान जैसे देश जहां अमेरिका की भूमिका हमेशा संवेदनशील मानी जाती रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर यह सवाल खड़ा कर दिया है कि क्या डोनाल्ड ट्रंप (Trump) अपनी विदेश नीति को लेकर गंभीर हैं या फिर यह सब कुछ उनकी चुनावी रणनीति का हिस्सा है?

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