रांची: तलाक और हलाला के बाद पूर्व पत्नी से दोबारा निकाह करने से इनकार करने के मामले में झारखंड हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी की है। कोर्ट ने कहा कि सिर्फ दोबारा निकाह से इनकार करना अपने आप में आपराधिक अपराध नहीं है। किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के खिलाफ दोबारा शादी के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता।
यह मामला गिरिडीह जिले का है। जस्टिस संजय कुमार द्विवेदी की अदालत में इमरान हुसैन की अग्रिम जमानत याचिका पर सुनवाई हुई। सुनवाई के बाद कोर्ट ने याचिका मंजूर करते हुए उन्हें राहत दी।
क्या कहा हाईकोर्ट ने?
अदालत ने स्पष्ट किया कि तलाक और हलाला की प्रक्रिया पूरी होने के बाद पूर्व पति का अपनी पूर्व पत्नी से दोबारा निकाह करने से मना करना अकेले किसी आपराधिक मामले का आधार नहीं बन सकता।
कोर्ट के मुताबिक, मुस्लिम पर्सनल लॉ या सामान्य आपराधिक कानून के तहत किसी व्यक्ति को उसकी इच्छा के विरुद्ध दोबारा विवाह करने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता।
सिर्फ इनकार पर नहीं होगी कार्रवाई
हाईकोर्ट ने कहा कि केवल इस आधार पर आपराधिक मामला नहीं बनाया जा सकता कि पूर्व पति ने तलाकशुदा पत्नी से दोबारा निकाह करने से इनकार कर दिया। हालांकि, यदि मामले में कोई अलग अपराध बनता है और उसके जरूरी तत्व मौजूद हैं, तो कानून के अनुसार कार्रवाई की जा सकती है।
इमरान हुसैन को मिली अग्रिम जमानत
गिरिडीह मामले में इमरान हुसैन ने गिरफ्तारी की आशंका के चलते हाईकोर्ट में अग्रिम जमानत की याचिका दाखिल की थी। अदालत ने मामले की सुनवाई के बाद उनकी याचिका स्वीकार कर ली और उन्हें अग्रिम जमानत की राहत दी।
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी से यह स्पष्ट हुआ कि किसी व्यक्ति की व्यक्तिगत इच्छा के खिलाफ उसे दोबारा विवाह के लिए मजबूर नहीं किया जा सकता और केवल विवाह से इनकार को अपने आप में आपराधिक कृत्य नहीं माना जाएगा।




