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ब्रिक्स समिट में पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज पर जोर

ब्रिक्स समिट में पश्चिम एशिया संकट, होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षित आवाजाही और ऊर्जा आपूर्ति के साथ स्थानीय मुद्रा में भुगतान पर चर्चा हो सकती है।
ब्रिक्स समिट

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New Delhi: ब्रिक्स समिट में पश्चिम एशिया में जारी संघर्ष और उससे जुड़े क्षेत्रीय सुरक्षा एवं ऊर्जा आपूर्ति के मुद्दे चर्चा के केंद्र में रह सकते हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक, समूह क्षेत्र में शत्रुता समाप्त करने की मांग कर सकता है। पश्चिम एशिया संकट का असर ब्रिक्स के कई सदस्य देशों पर प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से पड़ रहा है। इसका प्रभाव क्षेत्रीय सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति पर भी देखा जा रहा है। ऐसे में समिट में ऊर्जा सुरक्षा से जुड़े मुद्दे महत्वपूर्ण रह सकते हैं।

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होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा पर भी चर्चा

विशेषज्ञों के मुताबिक, ब्रिक्स समिट में प्रमुख तेल उत्पादक और तेल आयातक देशों के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति समझौतों पर चर्चा हो सकती है। इसके अलावा वैश्विक ऊर्जा व्यापार के लिए महत्वपूर्ण होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों की सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित करने के उपायों पर भी विचार हो सकता है। भारत और चीन दुनिया के दो सबसे बड़े तेल आयातक देशों में शामिल हैं। ऐसे में होर्मुज स्ट्रेट से होने वाले तेल और अन्य ऊर्जा यातायात में किसी भी तरह का व्यवधान दोनों देशों के लिए महत्वपूर्ण चिंता का विषय हो सकता है।

भारत-रूस और ब्राजील जैसे ऊर्जा उत्पादक देश भी समूह में

पीडब्ल्यूसी इंडिया के पार्टनर और लीडर मानस मजूमदार ने कहा कि पश्चिम एशिया का संकट शिखर सम्मेलन में चर्चा का प्रमुख विषय हो सकता है। उन्होंने कहा कि ब्रिक्स में रूस और ब्राजील जैसे प्रमुख ऊर्जा आपूर्तिकर्ता देशों के साथ भारत और चीन जैसे बड़े तेल आयातक देश भी शामिल हैं। मजूमदार के मुताबिक, इन देशों के बीच दीर्घकालिक ऊर्जा आपूर्ति और कीमतों को लेकर चर्चा की काफी संभावना है।

स्थानीय मुद्राओं में भुगतान का मुद्दा भी अहम

मानस मजूमदार ने कहा कि ब्रिक्स देशों के बीच सीमा पार भुगतान के लिए स्थानीय मुद्राओं के इस्तेमाल का मुद्दा भी इस साल के शिखर सम्मेलन में चर्चा का विषय बन सकता है। पिछले साल रियो में हुए शिखर सम्मेलन के एजेंडे में भी यह मुद्दा शामिल था। उस दौरान ब्रिक्स नेताओं ने व्यापार और वित्तीय लेन-देन में स्थानीय मुद्राओं के अधिक इस्तेमाल का आह्वान किया था। साथ ही, ऐसे भुगतान को आसान बनाने वाली व्यवस्थाएं विकसित करने के प्रयासों का समर्थन किया था।

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अहम खनिज और स्वच्छ ऊर्जा भी एजेंडे में

विशेषज्ञों के मुताबिक, शिखर सम्मेलन में अहम खनिजों की आपूर्ति श्रृंखलाओं को अधिक मजबूत और लचीला बनाने के उपायों पर भी चर्चा हो सकती है। इसके साथ बैटरी भंडारण के विस्तार और स्मार्ट ग्रिड के डिजिटलीकरण में तेजी लाने पर भी विचार की उम्मीद है। भारत में केपीएमजी के धातु एवं खनन क्षेत्र के प्रमुख के मुताबिक, ब्रिक्स 2026 शिखर बैठक महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में भारत के लिए चार प्रमुख अवसर उपलब्ध करा सकती है।

खनिज क्षेत्र में सहयोग के नए अवसर

डेलॉयट साउथ एशिया के पार्टनर और क्षेत्रीय प्रमुख के मुताबिक, भारत और अन्य ब्रिक्स देशों के बीच साझेदारियां गहरे खनिज अन्वेषण, अयस्क के लाभकारीकरण और प्रसंस्करण तथा इससे जुड़े डाउनस्ट्रीम मूल्यवर्धन की मौजूदा चुनौतियों से निपटने में सहयोग कर सकती हैं। यह सहयोग विशेष रूप से दुर्लभ और अन्य महत्वपूर्ण खनिजों के क्षेत्र में प्रौद्योगिकी लाइसेंसिंग एवं हस्तांतरण और अनुसंधान साझेदारियों से जुड़ा हो सकता है।

उन्होंने कहा कि ऐसी साझेदारियों के जरिए ई-कचरे और खनन अवशेषों के पुनर्चक्रण को भी बढ़ावा दिया जा सकता है। संसाधनों और प्रौद्योगिकियों को सुरक्षित करने के साथ ब्रिक्स अर्थव्यवस्थाओं के बीच अधिक सहयोग से स्वच्छ ऊर्जा समाधानों को अपनाने में भी तेजी आ सकती है।

पश्चिम एशिया से ऊर्जा और खनिज तक व्यापक एजेंडा

ब्रिक्स समिट में पश्चिम एशिया संकट और होर्मुज स्ट्रेट की सुरक्षा के साथ ऊर्जा आपूर्ति, स्थानीय मुद्राओं में भुगतान, अहम खनिजों की आपूर्ति श्रृंखला और स्वच्छ ऊर्जा से जुड़े मुद्दे भी महत्वपूर्ण चर्चा का हिस्सा बन सकते हैं।

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