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सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली 2025 पर जताई आपत्ति

वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का मिला अवसर

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दिल्ली/रांची: झारखंड में पुलिस महानिदेशक (DGP) की नियुक्ति के लिए बनाई गई नई नियमावली पर सुप्रीम कोर्ट ने गंभीर सवाल उठाए हैं। मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली तीन जजों की पीठ ने सुनवाई के दौरान झारखंड सरकार की संशोधित DGP चयन एवं नियुक्ति नियमावली, 2025 पर आपत्ति जताई। अदालत ने कहा कि नियमावली के कुछ प्रावधान सुप्रीम कोर्ट के पुराने दिशा-निर्देशों के खिलाफ हो सकते हैं।

DGP नियुक्ति के नए नियमों पर उठाए सवाल

झारखंड सरकार ने वर्ष 2025 में DGP की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव करते हुए नई नियमावली लागू की थी। इसके तहत ऐसे पुलिस अधिकारियों को भी DGP पद के लिए योग्य माना गया, जिनकी सेवानिवृत्ति में छह महीने से कम समय बचा हो। इसके लिए कार्योत्तर सेवा का प्रावधान किया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि यह नियम प्रथम दृष्टया प्रकाश सिंह मामले में दिए गए दिशा-निर्देशों का उल्लंघन करता है।

तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का मौका

सुनवाई के दौरान अदालत ने कहा कि यदि संबंधित नियम रद्द होता है, तो इसके तहत की गई वर्तमान DGP तदाशा मिश्रा की नियुक्ति भी प्रभावित हो सकती है। हालांकि, कोर्ट ने अभी उनकी नियुक्ति रद्द नहीं की है। अदालत ने तदाशा मिश्रा को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया है। साथ ही झारखंड सरकार को निर्देश दिया है कि उन्हें नोटिस उपलब्ध कराया जाए।

3 नवंबर को होगी अगली सुनवाई

सुप्रीम कोर्ट ने झारखंड सरकार को नियमावली पर दोबारा विचार करने या जवाबी हलफनामा दाखिल करने का विकल्प दिया है। वहीं, वरिष्ठ अधिवक्ता और न्याय मित्र राजू रामचंद्रन से नियमों की वैधता की जांच करने को कहा गया है।

अदालत ने संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) को भी न्याय मित्र का सहयोग करने का निर्देश दिया है। इस मामले में अगली सुनवाई 3 नवंबर को होगी।

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