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भारत–अफगानिस्तान नजदीकियों का नया दौर, पाकिस्तान में हलचल!

World News: अफगानिस्तान के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अज़ीज़ी की भारत यात्रा ने दो साल से ठहरे रिश्तों में एक बार फिर गर्माहट ला दी है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार इतना बड़ा और ठोस संवाद देखने को मिला

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World News: अफगानिस्तान के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्री अलहाज नूरुद्दीन अज़ीज़ी की भारत यात्रा ने दो साल से ठहरे रिश्तों में एक बार फिर गर्माहट ला दी है। तालिबान के सत्ता में आने के बाद पहली बार इतना बड़ा और ठोस संवाद देखने को मिला है। इस पूरी प्रक्रिया ने पाकिस्तान के सत्ताधारी वर्ग में असहजता बढ़ा दी है, क्योंकि काबुल अब खुलकर नए विकल्प तलाशता दिख रहा है।

वीज़ा से लेकर व्यापार तक- कई अहम फैसले

अज़ीज़ी ने साफ कहा कि भारत और अफगानिस्तान के बीच वीज़ा संबंधी सारे मुद्दे सुलझा लिए गए हैं। अब काबुल में भारतीय दूतावास व्यापारिक और चिकित्सा वीज़ा आसानी से जारी करेगा। अफगान नागरिकों के लिए भारत पहले से ही सबसे भरोसेमंद चिकित्सा केंद्र माना जाता है, इसलिए इस फैसले ने लोगों की उम्मीदें बढ़ा दी हैं।

यात्रा के दौरान दोनों देशों ने कई अटके हुए मुद्दों पर बात की-

  • बैंकिंग और कनेक्टिविटी

  • एफएसएसएआई शुल्क में राहत

  • संयुक्त कार्य समूह की बहाली

  • कपड़ा व्यापार बढ़ाने पर सहमति

अफगानिस्तान चाहता है कि वह भारत की कपड़ा और परिधान तकनीक का फायदा उठा सके। यह क्षेत्र दोनों देशों के बीच सबसे मजबूत व्यापारिक कड़ी माना जाता है।

पाकिस्तान पर निर्भरता कम करने का संकेत

अज़ीज़ी ने भारत के वाणिज्य मंत्री पीयूष गोयल से मुलाकात कर द्विपक्षीय व्यापार को 1 अरब डॉलर से ऊपर ले जाने का लक्ष्य तय किया। काबुल ने यह भी संकेत दिया कि पाकिस्तान पर अत्यधिक निर्भरता अब उसके लिए नुकसान साबित हो रही है। दोनों देशों की सीमा पर हाल की झड़पें, ट्रकों का फंसना और दवा आयात पर तीन महीने का प्रतिबंध इसी बदलाव का हिस्सा बताया जा रहा है। उनका बयान- “भारत बेहतर गुणवत्ता और बेहतर शर्तों वाला साझेदार है” – ने पाकिस्तान में भू-राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है।

नई राहें: एयर कॉरिडोर से चाबहार तक

चर्चा के दौरान भारत–अफगान एयर कॉरिडोर, चाबहार पोर्ट मार्ग, और मध्य एशिया से जुड़ने वाले जमीनी रास्तों को दोबारा सक्रिय करने पर भी सहमति बनी। ये सभी रास्ते पाकिस्तान की ट्रांज़िट मोनोपॉली को सीधे चुनौती देते हैं, यही कारण है कि इस यात्रा पर पाकिस्तान की नजरें टिकी रहीं।

दक्षिण एशिया के समीकरण बदलते दिखाई दे रहे हैं

दो सप्ताह में अफगान विदेश मंत्री और फिर वाणिज्य मंत्री की भारत यात्रा ने यह साफ कर दिया है कि काबुल अब भारत को दीर्घकालिक, स्थिर और भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रहा है। यह बदलाव न सिर्फ व्यापारिक है, बल्कि सामरिक और भू-राजनीतिक स्तर पर भी बहुत मायने रखता है।

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