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राहुल गांधी को फंसा गए अपने ही नेता! अब चुनावी सबूत ‘गायब’ बताने लगे नागेश

India News: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के एक नेता के कारण फंसते नजर आ रहे हैं। नेता ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिखकर लोकसभा चुनाव में फर्जीवाड़े के सबूत देने की बात कही थी, अब उनके ही पास वह

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India News: लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी अपनी ही पार्टी के एक नेता के कारण फंसते नजर आ रहे हैं। नेता ने राहुल गांधी को चिट्ठी लिखकर लोकसभा चुनाव में फर्जीवाड़े के सबूत देने की बात कही थी, अब उनके ही पास वह सबूत ही नहीं हैं। इस नेता के कथित सबूतों के आधार पर राहुल गांधी बेंगलुरु के फ्रीडम पार्क में पांच अगस्त को एक बड़े विरोध प्रदर्शन का नेतृत्व करने जा रहे हैं। उन्होंने केंद्र सरकार की पोल खोलने का दावा किया, लेकिन अब जिन सबूतों की बात की गई थी, वह गुम हो गए हैं।

बता दें कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री एच नागेश ने दावा किया था कि उनके पास कर्नाटक में चुनावी धांधली के ठोस सबूत हैं, लेकिन अब नागेश ने कर्नाटक के मुख्य निर्वाचन अधिकारी को पत्र लिखकर अप्रैल 2023 में जमा की गई शिकायत की प्रति मांगी, जिसमें उन्होंने महादेवपुरा विधानसभा क्षेत्र में मतदाता सूची में फर्जी एंट्री का आरोप लगाया था, लेकिन चुनाव आयोग ने कह दिया है कि उन्होंने कोई ऐसी जानकारी दी ही नहीं। उधर, एच नागेश कह रहे कि उन्होंने कागज तो चुनाव आयोग को दिया था, लेकिन चुनाव आयोग अब कह रहा कि वह गायब हो गए हैं।

जानकारों का कहना है कि इससे साफ हो गया कि जिन फर्जी सबूतों की बात की जा रही थी, वो हैं ही नहीं और अब चुनाव आयोग पर ठीकरा फोड़ा जा रहा है। बता दें नागेश ने 31 जुलाई 2025 को लिखे पत्र में दावा किया था कि उन्होंने 2023 विधानसभा चुनावों से पहले फर्जी वोटर एंट्रीज़ की सूची पेश की थी, लेकिन अब उसकी कोई प्रति उनके पास नहीं है। इस मामले में कर्नाटक सीईओ कार्यालय ने 2 अगस्त को जवाब दिया कि उनके पास अप्रैल 2023 का कोई रिकॉर्ड नहीं है। संयुक्त मुख्य निर्वाचन अधिकारी ने कहा कि वैधानिक मतदाता सूची ऑनलाइन उपलब्ध है और चुनाव के दौरान नागेश समेत सभी प्रत्याशियों को दी गई थी।

उन्होंने यह भी साफ किया कि नागेश ने जन प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कोई अपील या याचिका दायर नहीं की, जो इस दावे की गंभीरता पर सवाल उठाता है। यह घटनाक्रम राहुल गांधी के लिए मुश्किल पैदा कर सकता है, जो 5 अगस्त को बेंगलुरु में चुनाव आयोग और बीजेपी के खिलाफ प्रदर्शन करेंगे। नागेश को बीजेपी की एस मंजुला ने 44 हजार वोटों से हराया था। अब गायब दस्तावेजों का बहाना उनकी रणनीति को कमजोर करता है।

कांग्रेस का आरोप है कि बीजेपी ने मतदाता सूची में हेरफेर कर जीत हासिल की, लेकिन बिना सबूत के यह दावा हवा में लटक रहा है। सीईटो का जवाब साफ करता है कि कोई औपचारिक शिकायत दर्ज नहीं थी और ऑनलाइन उपलब्ध डेटा से जांच संभव थी, जिसे नागेश ने नहीं किया। राहुल गांधी की प्रेस कॉन्फ्रेंस में अब उनकी विश्वसनीयता दांव पर होगी। यदि वे सबूत पेश नहीं कर पाते, तो यह प्रदर्शन सियासी नौटंकी बन सकता है। दूसरी ओर बीजेपी इसे कांग्रेस की हताशा बता रही है। नागेश का गायब दस्तावेजों का दावा अब राहुल के लिए एक बड़ा सिरदर्द बन गया है।

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