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सियार के हमले में मां की मौत, पांच बच्चों के सिर से उठा साया

Kasmar : जंगली सियार के हमले में गंभीर रूप से घायल दुर्गापुर गांव के ललमटिया टोला निवासी 28 वर्षीय बुधनी देवी की जिंदगी आखिरकार नहीं बच सकी। 12 अगस्त को सियार के हमले के बाद घायल बुधनी का कसमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराया

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Kasmar : जंगली सियार के हमले में गंभीर रूप से घायल दुर्गापुर गांव के ललमटिया टोला निवासी 28 वर्षीय बुधनी देवी की जिंदगी आखिरकार नहीं बच सकी। 12 अगस्त को सियार के हमले के बाद घायल बुधनी का कसमार सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में इलाज कराया गया था। हालत बिगड़ने पर उन्हें रांची रिम्स ले जाया गया, जहां गुरुवार शाम इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई।

बुधनी की मौत से चार बेटियों और महज तीन साल के बेटे के सिर से मां का साया उठ गया। पहले से आर्थिक तंगी से जूझ रहे पति वनमाली महतो के सामने अब पांच छोटे बच्चों की परवरिश की बड़ी जिम्मेदारी आ गई है। परिवार की हालत ऐसी है कि मां की ममता के साथ बच्चों का भविष्य भी सवालों के घेरे में आ गया है।

तीन वैक्सीन के बाद क्या हुआ? उठे इलाज पर सवाल

परिजनों के अनुसार सियार के हमले के बाद बुधनी को एंटी-रेबीज वैक्सीन की केवल तीन खुराक दी गईं। इसके बाद उनकी हालत बिगड़ती गई। गंभीर पशु-काटने के मामले में निर्धारित एंटी-रेबीज उपचार और आवश्यक होने पर RIG दिए जाने का प्रावधान है।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि बुधनी को हमले के बाद कौन-कौन सा उपचार, कितनी वैक्सीन और किस अंतराल पर दी गईं तथा RIG दिया गया था या नहीं? इसका जवाब मेडिकल रिकॉर्ड की जांच से ही सामने आएगा। यदि उपचार प्रोटोकॉल में किसी तरह की चूक हुई है तो इसकी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए।

इलाज के साथ झाड़-फूंक ने बढ़ाई चिंता

परिजनों के अनुसार बुधनी का झाड़-फूंक और टोना-टोटका से भी इलाज कराया गया। गंभीर पशु-काटने के बाद यदि इस वजह से अस्पताल में निर्धारित उपचार लेने में देरी हुई हो तो यह भी जांच का विषय है।

रेबीज के संभावित संक्रमण में समय पर घाव की सफाई और चिकित्सकीय PEP सबसे महत्वपूर्ण है। लक्षण प्रकट होने के बाद रेबीज बेहद घातक बीमारी है।

मासूम बेटे समेत परिजनों को भी ऐहतियात जरूरी

मृतका के तीन वर्षीय बेटे और अन्य परिजनों को लेकर भी परिवार चिंतित है। हालांकि मरीज को छूने या उसके साथ रहने मात्र से रेबीज नहीं फैलता। लेकिन यदि मृतका की लार किसी बच्चे या परिजन के खुले घाव, आंख, मुंह अथवा नाक के संपर्क में आई हो तो तत्काल चिकित्सकीय जांच करानी चाहिए।

ऐसे किसी संभावित एक्सपोजर की स्थिति में डॉक्टर ही तय करेंगे कि एंटी-रेबीज वैक्सीन या RIG की जरूरत है या नहीं। बिना एक्सपोजर के केवल एहतियात के नाम पर वैक्सीन लेना जरूरी नहीं है।

अब प्रशासन से मदद की उम्मीद

बुधनी की मौत के बाद ग्रामीणों ने प्रशासन से गरीब परिवार को तत्काल आर्थिक सहायता उपलब्ध कराने, बच्चों की पढ़ाई और भविष्य की जिम्मेदारी में मदद करने तथा जंगली जानवर के हमले में मौत के लिए लागू सरकारी प्रावधानों के तहत मुआवजा देने की मांग की है।

एक जंगली सियार के हमले से शुरू हुई यह घटना अब पांच मासूम बच्चों के भविष्य का सवाल बन गई है।

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