रांची। झारखंड में कारोबार करने के बाद 77 निबंधित (रजिस्टर्ड) व्यापारी अपने पंजीकृत पते से लापता हो गए हैं। वाणिज्यकर विभाग की निगरानी शाखा की जांच में ये व्यापारी अपने बताए पते पर नहीं मिले। विभाग के अनुसार, इन व्यापारियों ने फर्जी दस्तावेज और पते के आधार पर रजिस्ट्रेशन लेकर कारोबार किया और बाद में फरार हो गए।
इनमें से अधिकांश व्यापारी कोयला और छड़-स्क्रैप कारोबार से जुड़े बताए जा रहे हैं। विभाग का अनुमान है कि इन व्यापारियों ने करीब 500 करोड़ रुपये का कारोबार किया है।
हजारीबाग में सबसे ज्यादा व्यापारी लापता
आंकड़ों के अनुसार, सबसे अधिक 27 व्यापारी हजारीबाग वाणिज्यकर प्रमंडल में जांच के दौरान अपने पते पर नहीं मिले। इसके बाद धनबाद में 21 और जमशेदपुर में 20 व्यापारी लापता पाए गए। रांची और दुमका में दो-दो तथा मुख्यालय स्तर पर दो ऐसे मामले सामने आए।
378 प्रतिष्ठानों की जांच
वाणिज्यकर विभाग की निगरानी शाखा ने वित्तीय वर्ष 2025-26 से अब तक 378 व्यापारिक प्रतिष्ठानों की जांच की। जांच के दौरान सभी प्रतिष्ठानों में किसी न किसी तरह की गड़बड़ी पाई गई। टैक्स में हुई गड़बड़ी की जांच के बाद संबंधित व्यापारियों से 130.06 करोड़ रुपये टैक्स के रूप में जमा कराए गए।
अधिकारियों की कमी से जांच प्रभावित
टैक्स चोरी और व्यापारिक गतिविधियों में गड़बड़ी पर नजर रखने के लिए विभाग में Intelligence and Revenue Analysis Unit (IRAU) काम करता है। IRAU व्यापारिक आंकड़ों का विश्लेषण कर पांच करोड़ रुपये से अधिक टर्नओवर वाले संदिग्ध व्यापारियों की जांच का लक्ष्य तय करता है।
वित्तीय वर्ष 2025-26 में 624 व्यापारियों की जांच का लक्ष्य था, लेकिन अधिकारियों की कमी के कारण केवल 310 व्यापारियों की जांच हो सकी। इनमें 41 व्यापारी अपने पते पर नहीं मिले। वहीं, वित्तीय वर्ष 2026-27 में अब तक 276 व्यापारियों को जांच के दायरे में रखा गया, जिनमें से 142 की जांच हुई। इस दौरान 33 व्यापारी अपने ठिकाने पर नहीं मिले।
प्रमंडलवार स्थिति
| प्रमंडल | जांच | टैक्स गड़बड़ी | लापता व्यापारी |
|---|---|---|---|
| रांची | 56 | 16.69 करोड़ | 2 |
| जमशेदपुर | 63 | 42.71 करोड़ | 20 |
| धनबाद | 85 | 16.40 करोड़ | 21 |
| हजारीबाग | 102 | 39.81 करोड़ | 27 |
| दुमका | 45 | 6.08 करोड़ | 2 |
| मुख्यालय | 27 | 8.37 करोड़ | 2 |
| कुल | 378 | 130.06 करोड़ | 74 |
नोट: उपलब्ध प्रमंडलवार आंकड़ों में लापता व्यापारियों की संख्या 74 है, जबकि ऊपर दिए गए वित्तीय वर्षवार आंकड़ों को जोड़ने पर 77 का आंकड़ा बनता है। प्रकाशन से पहले विभागीय आंकड़ों से इस अंतर की पुष्टि करना उचित होगा।




