Career Adda: भारत से हर साल हजारों छात्र डॉक्टर बनने का सपना पूरा करने के लिए विदेश का रुख करते हैं। आमतौर पर रूस, कजाकिस्तान, जॉर्जिया या उज्बेकिस्तान जैसे देशों से एमबीबीएस करने वाले छात्रों को भारत लौटकर प्रैक्टिस करने के लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की फॉरेन मेडिकल ग्रेजुएट एग्जामिनेशन (FMGE) पास करनी होती है। यह परीक्षा काफी कठिन मानी जाती है और इसका पासिंग प्रतिशत बेहद कम रहता है।
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हालांकि, बहुत कम छात्रों को जानकारी है कि दुनिया में 5 प्रमुख अंग्रेजी भाषी देश ऐसे भी हैं, जहाँ से मेडिकल की पढ़ाई और स्थानीय लाइसेंस प्राप्त करने पर भारत में सीधे मेडिकल रजिस्ट्रेशन का अधिकार मिल जाता है और एफएमजीई परीक्षा देने की जरूरत नहीं होती।
किन 5 देशों से मेडिकल करने पर मिलती है FMGE से छूट?
1. संयुक्त राज्य अमेरिका (USA): अमेरिका में एमबीबीएस पाठ्यक्रम को एमडी (डॉक्टर ऑफ मेडिसिन) कहा जाता है। यदि कोई छात्र अमेरिका से एमडी करने के बाद USMLE (यूनाइटेड स्टेट्स मेडिकल लाइसेंसिंग एग्जामिनेशन) के सभी चरण पास कर वहां का वैध मेडिकल लाइसेंस हासिल कर लेता है, तो उसे भारत में एफएमजीई नहीं देनी पड़ती।
2. यूनाइटेड किंगडम (UK): ब्रिटेन से एमबीबीएस की पढ़ाई पूरी करने के बाद छात्रों को PLAB (प्रोफेशनल एंड लिंग्विस्टिक असेसमेंट्स बोर्ड) परीक्षा पास कर ‘जनरल मेडिकल काउंसिल’ (GMC) में रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसके बाद वे भारत में सीधे प्रैक्टिस के पात्र होते हैं।
3. ऑस्ट्रेलिया (Australia): ऑस्ट्रेलिया से मेडिकल डिग्री लेने के बाद छात्रों को AMC (ऑस्ट्रेलियन मेडिकल काउंसिल) की परीक्षा पास करनी होती है। स्थानीय मेडिकल लाइसेंस मिलते ही भारत में NMC सीधे प्रैक्टिस की मंजूरी दे देता है।
4. कनाडा (Canada): कनाडा से डिग्री लेने वाले छात्रों को MCCQE (मेडिकल काउंसिल ऑफ कनाडा क्वालिफाइंग एग्जामिनेशन) पास करके वहां लाइसेंस्ड डॉक्टर बनना होता है। इसके बाद वे भारत में बिना FMGE दिए क्लिनिक खोल सकते हैं या अस्पताल में काम कर सकते हैं।
5. न्यूजीलैंड (New Zealand): न्यूजीलैंड में मेडिकल पूरा करने के बाद छात्रों को NZREX (न्यूजीलैंड रजिस्ट्रेशन एग्जामिनेशन) के जरिए आधिकारिक लाइसेंस मिलता है। इस लाइसेंस के आधार पर भारत में FMGE से पूरी छूट मिलती है।
सबसे अहम शर्त: डिग्री के साथ स्थानीय प्रैक्टिस लाइसेंस है अनिवार्य
एनएमसी के नियमों के तहत यह छूट केवल देश में पढ़ाई करने भर से नहीं मिलती। छात्रों के लिए उस संबंधित देश का आधिकारिक मेडिकल प्रैक्टिस लाइसेंस प्राप्त करना अनिवार्य है। यदि छात्र केवल इन देशों से डिग्री लेते हैं लेकिन वहां का लाइसेंसिंग एग्जाम पास नहीं करते, तो उन्हें भी भारत लौटने पर एफएमजीई परीक्षा में बैठना पड़ेगा।
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