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अगुवानी घाट पुल बनते ही बदल जाएगी कनेक्टिविटी, जानिए कब होगा तैयार

खगड़िया-भागलपुर को जोड़ने वाले 3.160 किमी लंबे अगुवानी घाट महासेतु का निर्माण 2026-27 में पूरा करने का लक्ष्य है, जिससे आवागमन आसान होगा।

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Patna: बिहार के खगड़िया और भागलपुर के बीच कनेक्टिविटी को बेहतर करने वाली अगुवानी घाट पुल परियोजना का निर्माण कार्य तेजी से आगे बढ़ रहा है। पथ निर्माण विभाग के सचिव पंकज कुमार पाल के अनुसार, महासेतु और इसके एप्रोच रोड का निर्माण वित्तीय वर्ष 2026-27 में पूरा करने का लक्ष्य तय किया गया है। गंगा नदी पर बन रहे इस पुल के तैयार होने से खगड़िया, भागलपुर के सुल्तानगंज समेत कोसी और अंग क्षेत्र के कई जिलों के लोगों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।

3.160 किमी लंबा होगा महासेतु

अगुवानी घाट पुल एक आरसीसी हाई लेवल ब्रिज है, जिसकी कुल लंबाई 3.160 किलोमीटर और चौड़ाई दो लेन में 8.5 मीटर है। इसे 1,710 करोड़ 77 लाख रुपये की लागत से बनाया जा रहा है। पुल पर पैदल यात्रियों की सुविधा के लिए दोनों तरफ 1.5-1.5 मीटर चौड़े फुटपाथ का भी प्रावधान किया गया है।

सुल्तानगंज और अगुवानी की ओर बनेगी एप्रोच रोड

महासेतु को मुख्य मार्गों से जोड़ने के लिए सुल्तानगंज की ओर 4 किलोमीटर और अगुवानी की ओर 16 किलोमीटर लंबी एप्रोच रोड का निर्माण किया जा रहा है। पथ निर्माण विभाग के सचिव के अनुसार, परियोजना के अलग-अलग कार्य 70 से 98 प्रतिशत तक पूरे किए जा चुके हैं। शेष काम भी जल्द पूरा करने की दिशा में काम चल रहा है।

कई जिलों को मिलेगा सीधा फायदा

अगुवानी घाट पुल के तैयार होने से खगड़िया, सहरसा, मधेपुरा जैसे उत्तरी बिहार के इलाकों को भागलपुर, बांका और जमुई समेत दक्षिणी बिहार के क्षेत्रों से बेहतर कनेक्टिविटी मिलेगी। इसके अलावा मंगौना, अगुवानी, परबत्ता, महेशखूंट, बेगूसराय और मुंगेर के लोगों को भी आवागमन में सुविधा होगी।

मुंगेर और विक्रमशिला से लगने वाला चक्कर होगा कम

फिलहाल खगड़िया से सुल्तानगंज या भागलपुर जाने के लिए लोगों को मुंगेर पुल या भागलपुर के विक्रमशिला सेतु के रास्ते लंबा चक्कर लगाना पड़ता है। इससे यात्रा में काफी समय लगता है। अगुवानी घाट पुल शुरू होने के बाद खगड़िया और सुल्तानगंज के बीच सीधा संपर्क स्थापित होगा। इससे यात्रा की दूरी और समय कम होने की उम्मीद है। साथ ही अगुवानी और सुल्तानगंज के बीच गंगा पार करने के लिए स्थानीय लोगों और श्रद्धालुओं की नावों पर निर्भरता भी कम होगी।

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