Giridih: झारखंड की पावन और प्राकृतिक सौंदर्य से परिपूर्ण धरती गिरिडीह के मधुबन में आदिवासी संस्कृति, आस्था और अटूट अस्मिता का महाकुंभ पूरी भव्यता के साथ आगाज हुआ। बहुप्रतीक्षित ‘मारांग बुरू घोरोमगाड़ महासम्मेलन’ को लेकर पिछले कई दिनों से चल रही तैयारियां आखिरकार रंग लाईं और मधुबन का थाना मैदान आदिवासी संस्कृति के रंगों, पारंपरिक नगाड़ों की थाप और ‘जोहार मारांग बुरू’ के नारों से गूंज उठा।
इस ऐतिहासिक और विशाल आयोजन में झारखंड के सीएम हेमंत सोरेन मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। उनके आगमन से सम्मेलन में मौजूद हजारों श्रद्धालुओं और प्रकृति प्रेमियों का उत्साह चरम पर पहुंच गया।
मधुबन थाना मैदान में सजा भव्य पंडाल, नेपाल तक से पहुंचे श्रद्धालु
महासम्मेलन को ऐतिहासिक स्वरूप देने के लिए मधुबन थाना मैदान में एक विशाल और भव्य पंडाल का निर्माण कराया गया था। सुबह से ही झारखंड के कोने-कोने के अलावा ओडिशा, पश्चिम बंगाल, छत्तीसगढ़, असम और पड़ोसी देश नेपाल से भी भारी संख्या में आदिवासी समाज के लोग, श्रद्धालु और प्रबुद्ध जन मधुबन पहुंचना शुरू हो गए थे। पूरा इलाका सांस्कृतिक उल्लास और एकता की मिसाल बन गया।
मारांग बुरू को नमन और सीएम का संबोधन
कार्यक्रम में पहुंचते ही सीएम हेमंत सोरेन ने आदिवासी समाज के सर्वोच्च आराध्य और प्रकृति की असीम शक्ति के प्रतीक ‘मारांग बुरू’ की पूजा-अर्चना की और शीश झुकाकर शत-शत नमन किया।
इसके बाद अपने आधिकारिक ‘X’ हैंडल पर अपनी भावनाएं साझा करते हुए सीएम ने लिखा:
आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान के प्रतीक मारांग बुरू को शत-शत नमन।
आज गिरिडीह की पावन धरती पर आयोजित ऐतिहासिक मारांग बुरू घोरोमगाड़ महासम्मेलन में शामिल हुआ। मारांग बुरू की पावन धरती पर विभिन्न राज्यों से आये सभी गणमान्य अतिथियों और लोगों का मैं हार्दिक स्वागत और आभार करता हूँ।
जोहार! जोहार मारांग बुरू!
https://t.co/Zzgw0idVY6— Hemant Soren (@HemantSorenJMM) November 5, 2026
“आदिवासी अस्मिता, संस्कृति और स्वाभिमान के प्रतीक मारांग बुरू को शत-शत नमन। आज गिरिडीह की पावन धरती पर आयोजित ऐतिहासिक मारांग बुरू घोरोमगाड़ महासम्मेलन में शामिल हुआ। मारांग बुरू की पावन धरती पर विभिन्न राज्यों से आये सभी गणमान्य अतिथियों और लोगों का मैं हार्दिक स्वागत और आभार करता हूँ। जोहार! जोहार मारांग बुरू!”
सम्मेलन को संबोधित करते हुए सीएम ने जल, जंगल, जमीन और अपनी मूल संस्कृति को सहेजने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि अपनी परंपराओं की रक्षा करना ही हमारा असली स्वाभिमान है और सरकार इसके लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।
सुरक्षा के चाक-चौबंद इंतजाम और प्रशासनिक मुस्तैदी
सीएम के आगमन और देश-विदेश से जुटे विशाल जनसैलाब को देखते हुए जिला प्रशासन पूरी तरह मुस्तैद नजर आया। गिरिडीह के डीसी रामनिवास यादव और एसपी डॉ. बिमल कुमार खुद मौके पर डटे रहे और चप्पे-चप्पे की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए यातायात नियंत्रण, सुव्यवस्थित वाहन पार्किंग, शुद्ध पेयजल और अन्य बुनियादी सुविधाओं के व्यापक इंतजाम किए गए थे, ताकि किसी भी आगंतुक को असुविधा का सामना न करना पड़े। गिरिडीह की धरती पर हुआ यह महासम्मेलन आदिवासी समाज की एकता और सांस्कृतिक पुनर्जागरण का एक नया और स्वर्णिम अध्याय बन गया है।






