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पाकिस्तान में महा-जलसंकट: बूंद-बूंद पानी को तरसा सिंध, ₹90 अरब का चावल उद्योग ठप!

कराची: पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण जल संकट से जूझ रहा है। देश के सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी की भारी किल्लत के कारण कृषि और पूरी अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। सिंचाई अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि

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कराची: पाकिस्तान इस समय अपने इतिहास के सबसे भीषण जल संकट से जूझ रहा है। देश के सिंध और बलूचिस्तान प्रांतों में पानी की भारी किल्लत के कारण कृषि और पूरी अर्थव्यवस्था पर बड़ा खतरा मंडराने लगा है। सिंचाई अधिकारियों ने चेतावनी दी है कि इस संकट के चलते लारकाना, शिकारपुर और बलूचिस्तान के निचले इलाकों में मौसमी फसलों, विशेषकर चावल (धान) की खेती पूरी तरह तबाह हो सकती है। सिंधु जल समझौते के बदलते समीकरणों के बीच उपजे इस संकट ने पाकिस्तान की कमर तोड़ दी है।

सुक्कुर बैराज कंट्रोल रूम के आंकड़ों के मुताबिक, सिंध प्रांत के पानी में 39.6 प्रतिशत की भारी कमी दर्ज की गई है। सबसे बदतर स्थिति दादू नहर की है, जहां कोटे से 85.7% कम पानी मिल रहा है। इस पानी की कमी के कारण पाकिस्तान के बासमती चावल उद्योग को सबसे बड़ा झटका लगा है। लारकाना चैंबर ऑफ कॉमर्स के अध्यक्ष खैर मोहम्मद शेख के अनुसार, लारकाना हर साल चावल निर्यात से देश को 90 अरब रुपये की विदेशी मुद्रा कमा कर देता है, जो अब पूरी तरह ठप होने की कगार पर है। क्षेत्र की 500 से अधिक राइस मिलों पर ताला लटकने की नौबत आ गई है।

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