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चैनपुर प्रखंड में पुल निर्माण में देरी से लोगों की समस्या बढ़ी, आवागमन बाधित

चैनपुर: बरसात का मौसम शुरू होते ही चैनपुर प्रखंड में सड़क निर्माण के साथ बन रहे पुल-पुलिया की खराब स्थिति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दो साल बीत जाने के बावजूद कई पुलियों का निर्माण अधूरा है, जिससे आम जनता को भारी मुश्किलों

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चैनपुर: बरसात का मौसम शुरू होते ही चैनपुर प्रखंड में सड़क निर्माण के साथ बन रहे पुल-पुलिया की खराब स्थिति ने लोगों की परेशानी बढ़ा दी है। दो साल बीत जाने के बावजूद कई पुलियों का निर्माण अधूरा है, जिससे आम जनता को भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। सरकार द्वारा डायवर्सन वैकल्पिक रास्ता बनाने के लिए लाखों रुपये आवंटित किए जाते हैं, लेकिन संवेदक और अधिकारियों की लापरवाही के कारण ये डायवर्सन भी बरसात की भेंट चढ़ गए हैं।स्थानीय लोगों के अनुसार, सुगसरवा के पास बन रहा एक पुल टूट गया है, जिससे दोनों ओर का आवागमन पूरी तरह से बाधित हो गया है। इसके कारण लोगों को प्रखंड कार्यालय और अन्य आवश्यक कामों के लिए करीब 20 किलोमीटर का लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है।डॉन बॉस्को स्कूल, केड़ेंग के प्रभारी फादर भलेरियुस लकड़ा ने बताया कि उनके स्कूल में भेलवातला, बिशनपुर, डुमरी और अन्य दूरदराज के क्षेत्रों से बच्चे आते हैं। पुलिया का निर्माण न होने और बनाए गए डायवर्सन के बह जाने से बच्चों को स्कूल आने-जाने में बहुत दिक्कत हो रही है। इस समस्या के कारण कई बच्चों ने तो स्कूल आना ही छोड़ दिया है।ग्राम प्रधान जॉर्ज टोप्पो और अन्य ग्रामीणों ने बताया कि गाय और बकरी चराने के लिए उन्हें नदी के उस पार जाना पड़ता है। अचानक भारी बारिश होने पर नदी में पानी भर जाने से उन्हें रात भर उस पार ही रुकना पड़ता है, जब तक कि पानी कम न हो जाए। इससे उनकी दैनिक गतिविधियां बुरी तरह प्रभावित हो रही हैं। इसी तरह, खेती-बाड़ी के समय भी किसानों को ऐसी ही समस्याओं का सामना करना पड़ता है। चैनपुर प्रखंड उप-प्रमुख प्रमोद खलखो ने कहा कि अधिकारियों को लोगों की इस समस्या को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। दो साल से बन रहे पुल का आज तक पूरा न होना विभाग की घोर लापरवाही को दर्शाता है, जिसका सीधा असर स्कूली बच्चों, किसानों और आम जनता पर पड़ रहा है।जिला परिषद सदस्य मेरी लकड़ा ने भी मौके पर पहुंचकर लोगों की समस्याओं को समझा। उन्होंने संवेदक और अधिकारियों की लापरवाही को ‘निंदनीय’ बताया और विभाग से तत्काल डायवर्सन बनाने की गुहार लगाई। मेरी लकड़ा ने संवेदक से फोन पर संपर्क करने की कोशिश की, लेकिन उन्होंने फोन नहीं उठाया।इस लापरवाही का खामियाजा केवल आवागमन तक ही सीमित नहीं है। नदी का तेज बहाव कई किसानों के खेतों में कटाव का कारण भी बन रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से जल्द से जल्द एक सुरक्षित डायवर्सन बनाने की मांग की है ताकि उनकी दैनिक मुश्किलें कम हो सकें।

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