Health Adda: आधुनिक और भागदौड़ भरी जीवनशैली की अंधी दौड़ ने आज हर किसी को एक ऐसे चक्रव्यूह में फंसा दिया है, जहां पर्याप्त नींद लेना किसी विलासिता जैसा लगने लगा है। काम के बढ़ते दबाव और निरंतर प्रतिस्पर्धा के बीच सबसे पहले लोगों की नींद और मानसिक सुकून की ही अनदेखी होती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के अनुसार, पर्याप्त नींद न मिलने से शरीर के हार्मोन्स का संतुलन पूरी तरह गड़बड़ा जाता है, जिससे बेवजह तेज भूख लगती है और दिनभर थकान व सुस्ती छाई रहती है। यह स्थिति न केवल एनर्जी लेवल को गिराती है, बल्कि खान-पान की अस्वास्थ्यकर आदतों को भी बढ़ावा देती है।
हार्मोन्स के असंतुलन से बढ़ती है भूख
डॉक्टरों के मुताबिक, जब शरीर को पूरी नींद नहीं मिलती, तो भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन ‘लेप्टिन’ (Leptin) का स्तर तेजी से नीचे गिर जाता है, जबकि भूख बढ़ाने वाले हार्मोन ‘घ्रेलिन’ (Ghrelin) का स्तर काफी बढ़ जाता है। इस हार्मोनल बदलाव की वजह से व्यक्ति को बार-बार तेज भूख लगती है और वह चिप्स, बर्गर जैसे अनहेल्दी और जंक फूड की तरफ ज्यादा आकर्षित होने लगता है।
कॉर्टिसोल बढ़ने से बढ़ता है पेट का फैट और डायबिटीज का रिस्क
लगातार बना रहने वाला वर्क स्ट्रेस शरीर में कॉर्टिसोल (Cortisol) यानी स्ट्रेस हार्मोन को बढ़ा देता है। यह हार्मोन सीधे तौर पर पेट के आसपास जिद्दी फैट जमा करने का काम करता है, जिससे मोटापे का खतरा बढ़ता है। इसके अलावा, कॉर्टिसोल का बढ़ा हुआ स्तर ब्लड शुगर को अनियंत्रित कर इंसुलिन रेजिस्टेंस पैदा करता है, जिससे आगे चलकर टाइप-2 डायबिटीज होने की संभावना बढ़ जाती है। कम नींद से तनाव बढ़ता है, तनाव से खराब डाइट की आदत बनती है और यह बिगड़ा हुआ रूटीन मेटाबॉलिज्म को धीमा कर देता है।
बिना लक्षण अंदर से खोखला कर रहा यह रूटीन
स्वास्थ्य विशेषज्ञ इस व्यस्त रूटीन को एक ‘साइलेंट किलर’ मानते हैं, जो बिना किसी शुरुआती लक्षण के शरीर को आंतरिक रूप से नुकसान पहुंचाता है। समय पर भोजन न करना, पैकेज्ड फूड पर निर्भर रहना और एक्सरसाइज से दूरी बनाना आज आम बात हो गई है। ब्लड प्रेशर का बढ़ना, शुगर का असंतुलन और सुस्त मेटाबॉलिज्म तब तक पकड़ में नहीं आते जब तक कि बड़ा नुकसान न हो जाए। विशेषज्ञों की सलाह है कि इस गंभीर खतरे से बचने के लिए रोजाना पर्याप्त और गुणवत्तापूर्ण नींद जरूर लें।





