कोलकाता: पश्चिम बंगाल के बीरभूम जिले में भ्रष्टाचार और अवैध काली कमाई के खिलाफ जांच एजेंसियों की बड़ी कार्रवाई जारी है। करोड़ों रुपये की नकदी और भारी मात्रा में सोना बरामद किए जाने के मामले में पुलिस पत्थर कारोबारी टुलु मंडल के रिश्तेदार मिनार मंडल से गहन पूछताछ कर रही है। शुरुआती जांच में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि मिनार के ठिकाने से जब्त किया गया सोना विदेशों (दुबई) से तस्करी कर भारत लाया गया था।
अधिकारियों का कहना है कि अब तक कुल मिलाकर लगभग 50 करोड़ रुपये मूल्य की नकदी और सोना जब्त किया जा चुका है, जो इस पूरे आर्थिक अपराध सिंडिकेट का महज एक छोटा हिस्सा (“हिमशैल का ऊपरी हिस्सा”) माना जा रहा है। जांच आगे बढ़ने के साथ ही इस अवैध नेटवर्क के कई और बड़े चेहरों और अंतरराज्यीय व अंतरराष्ट्रीय संपर्कों का पर्दाफाश होने की संभावना है।
पुलिस और अभियोजन पक्ष का दावा है कि यह विशाल संपत्ति सरकारी राजस्व की चोरी, बालू व पत्थर खदानों में अनियमितता, जमीनों पर जबरन कब्जे और अवैध वसूली जैसी आपराधिक गतिविधियों के जरिए जुटाई गई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए राज्य सरकार इस जांच में ‘भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम’ (Prevention of Corruption Act) की धाराएं जोड़ने पर भी विचार कर रही है। फिलहाल आरोपियों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 409 (सरकारी संपत्ति का दुरुपयोग) और धारा 111 (संगठित अपराध) के तहत मामला दर्ज किया गया है।
यह पूरा मामला मूल रूप से डकैती के एक मुकदमे की जांच के दौरान सामने आया। पुलिस ने मंगलवार देर रात अर्जुन लोहार और शेख गियासुद्दीन समेत सात आरोपियों को गिरफ्तार किया था। उनसे मिली जानकारी के आधार पर मोहम्मदबाजार के देउचा स्थित मिनार मंडल के घर पर मंगलवार रात से गुरुवार सुबह तक मैराथन छापेमारी चलाई गई, जिसमें नोटों और सोने के बिस्कुटों का विशाल ढेर बरामद हुआ।
पूछताछ में पता चला कि मिनार ने शुरुआती चरण में जांच में अड़चन डालने की कोशिश की थी। बीरभूम पुलिस अधीक्षक के अनुसार, जब्त धन का सीधा संबंध टुलु मंडल के आपराधिक सिंडिकेट से है। टुलु मंडल विधानसभा चुनाव के नतीजों के बाद से ही फरार चल रहा है। पुलिस ने उसके सुभाषपल्ली, सोंतशाल स्थित आवासों और अन्य ठिकानों पर भी समानांतर छापेमारी की है ताकि इस आर्थिक नेटवर्क की पूरी जड़ तक पहुंचा जा सके।




