फॉण्ट कनवर्टर NEW

Advertisement
Advertisement

रुसी कंपनियों की भारतीय कामगारों को नियुक्त करने में गहरी रुचि? जानें पूरी रिपोर्ट

World News: अमेरिका के भारत पर लगाए 50 फीसदी टैरिफ को लेकर रूस अब भारत के लिए ढाल बनकर सामने आया है। हथियारों से लेकर सस्ते तेल तक… वह कई चीजें भारत को देने को तैयार है जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हमले के

अपनी भाषा में पढ़ें

Advertisement

World News: अमेरिका के भारत पर लगाए 50 फीसदी टैरिफ को लेकर रूस अब भारत के लिए ढाल बनकर सामने आया है। हथियारों से लेकर सस्ते तेल तक… वह कई चीजें भारत को देने को तैयार है जिससे राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के टैरिफ हमले के असर को बेअसर किया जा सके। एक रिपोर्ट के मुताबिक यूक्रेन के साथ जंग में उलझे रूस भारी लेबर संकट से जूझ रहा है। इस संकट को दूर करने के लिए रूस अब अपनी पारंपरिक श्रम आपूर्ति, यानी पूर्व सोवियत गणराज्यों से आगे बढ़कर एशियाई देशों की ओर रुख कर रहा है। इस दिशा में भारत एक प्रमुख साझेदार के रूप में उभरा है।

मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में बढ़ी मांग

रूस में भारत के राजदूत विनय कुमार ने हाल ही में बताया कि रूसी कंपनियां विशेष रूप से मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र में भारतीय कामगारों को नियुक्त करने में गहरी रुचि दिखा रही हैं। दूसरी तरफ भारत में बड़ी संख्या में युवाओं को अच्छी नौकरी की जरूरत है, लेकिन उन्हें अच्छे अवसर नहीं मिलते हैं। ऐसे में रूस में रोजगार के नए दरवाजे खुलने से भारतीय परिवारों में खुशियां लौट आएंगी।
यह कदम रूस की अर्थव्यवस्था को स्थिर करने और श्रम की कमी को पूरा करने की दिशा में एक अहम प्रयास है।

रूस में पिछले कुछ सालों में भारतीय कामगारों की संख्या में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। थिंक टैंक ऑब्जर्वर रिसर्च फाउंडेशन के मुताबिक रूसी सरकार के आंकड़ों से पता चलता है कि 2021 में जहां केवल 5,480 भारतीयों को रूस में वर्क परमिट जारी किए थे, वहीं 2024 में यह संख्या बढ़कर 36,208 हो गई। यह आंकड़ा रूस की श्रम जरुरतों और भारतीय कामगारों की बढ़ती मांग को स्पष्ट करता है। विनय कुमार ने बताया कि रूस में भारतीय कामगार मुख्य रूप से निर्माण और कपड़ा क्षेत्रों में कार्यरत हैं, लेकिन अब मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स जैसे उच्च-कौशल वाले क्षेत्रों में भी उनकी मांग बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि रूस में जनशक्ति की जरुरत है और भारत के पास कुशल जनशक्ति उपलब्ध है। वर्तमान में रूसी नियमों और कोटा प्रणाली के तहत कंपनियां भारतीयों को नियुक्त कर रही हैं। भारतीय कामगारों की बढ़ती संख्या ने दूतावास और वाणिज्य दूतावासों पर भी दबाव बढ़ाया है। राजदूत ने बताया कि पासपोर्ट नवीनीकरण, बच्चों के जन्म प्रमाणपत्र, पासपोर्ट के नुकसान जैसे कांसुलर सेवाओं की मांग में वृद्धि हुई है। बीते जुलाई में पीएम मोदी ने अपनी रूस यात्रा के दौरान मॉस्को में भारतीय समुदाय को संबोधित करते हुए येकातेरिनबर्ग और कज़ान में दो नए वाणिज्य दूतावास खोलने की घोषणा की थी, ताकि यात्रा और व्यापार को बढ़ावा दिया जा सके।

रूस अब केवल भारत ही नहीं बल्कि म्यांमार, श्रीलंका और उत्तर कोरिया जैसे अन्य एशियाई देशों से भी कामगार लाने की योजना बना रहा है। उरल्स चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री के प्रमुख आंद्रेई बेसेडिन ने हाल ही में दावा किया था कि 2025 के अंत तक रूस में 10 लाख भारतीय कामगार आ सकते हैं। हालांकि, रूसी श्रम मंत्रालय ने इस दावे को खारिज करते हुए कहा कि यह सटीक नहीं है और विदेशी कामगारों की भर्ती कोटा प्रणाली के तहत ही होगी।

WhatsApp Group जुड़ने के लिए क्लिक करें 👉 Join Now
Facebook
X
Threads
WhatsApp
Telegram