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गुरु पूर्णिमा: जानें शुभ मुहूर्त, पूजा विधि और महर्षि वेदव्यास जयंती का विशेष धार्मिक महत्व

रांची: सनातन धर्म में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले गुरुजनों और मार्गदर्शकों को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन

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रांची: सनातन धर्म में गुरु का स्थान ईश्वर से भी ऊपर माना गया है। जीवन के अंधकार को मिटाकर ज्ञान का प्रकाश फैलाने वाले गुरुजनों और मार्गदर्शकों को समर्पित गुरु पूर्णिमा का पावन पर्व आषाढ़ मास की पूर्णिमा तिथि को मनाया जाता है। इस दिन को ‘व्यास पूर्णिमा’ के नाम से भी जाना जाता है, क्योंकि इसी दिन महाभारत और चारों वेदों के रचयिता महर्षि वेदव्यास जी का जन्म हुआ था। वर्ष 2026 में गुरु पूर्णिमा 29 जुलाई 2026 (बुधवार) को मनाई जाएगी।

गुरु पूर्णिमा 2026: शुभ मुहूर्त और तिथि

वैदिक पंचांग के अनुसार, आषाढ़ पूर्णिमा तिथि की शुरुआत और समापन का समय इस प्रकार है:

  • पूर्णिमा तिथि समापन: 29 जुलाई 2026, रात 8:05 बजे तक
  • उदया तिथि और मुख्य पर्व: 29 जुलाई 2026

  • पूजा का शुभ समय: 29 जुलाई को सुबह 5:40 बजे से दोपहर 12:00 बजे तक गुरु पूजन व धार्मिक अनुष्ठानों के लिए अत्यंत शुभ समय माना गया है।

सनातन परंपरा में उदया तिथि का विशेष मान होने के कारण पूर्णिमा से जुड़े सभी व्रत, पूजा, जप और दान-पुण्य के कार्य 29 जुलाई को ही किए जाएंगे।

क्यों मनाई जाती है व्यास पूर्णिमा?

‘गुरु’ शब्द में ‘गु’ का अर्थ अंधकार और ‘रु’ का अर्थ प्रकाश से होता है। अर्थात जो अज्ञान रूपी अंधकार से खींचकर ज्ञान के उजाले की ओर ले जाए, वही सच्चा गुरु है।

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, महर्षि वेदव्यास जी सनातन धर्म के प्रथम गुरु (आदि गुरु) माने जाते हैं। उन्होंने वेदों का संपादन किया और पुराणों की रचना कर मानव जाति को मार्ग दिखाया। इस दिन शिष्य अपने-अपने गुरुओं का पूजन कर उनके प्रति कृतज्ञता व्यक्त करते हैं और उनका आशीर्वाद प्राप्त करते हैं।

सरल एवं प्रामाणिक पूजा विधि

गुरु पूर्णिमा के दिन प्रातः काल से ही भक्तिमय माहौल रहता है। आप घर पर या गुरु आश्रम में इस प्रकार पूजा कर सकते हैं:

  1. स्नान व संकल्प: प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में उठकर पवित्र नदी या पानी में गंगाजल मिलाकर स्नान करें। पीले या स्वच्छ वस्त्र धारण करें।

  2. सूर्य देव को अर्घ्य: जल में थोड़ा सा रोली और लाल फूल मिलाकर भगवान सूर्य को अर्घ्य दें।

  3. वेदव्यास एवं इष्टदेव पूजन: घर के मंदिर में भगवान विष्णु, शिव जी और महर्षि वेदव्यास जी के चित्र या मूर्ति पर पीले फूल, अक्षत और चंदन अर्पित करें।

  4. गुरु वंदना व तिलक: यदि संभव हो तो अपने प्रत्यक्ष गुरु के दर्शन करें। उनके चरण स्पर्श कर चरणामृत लें, उन्हें पुष्पमाला पहनाएं, रोली का तिलक लगाएं और श्रद्धापूर्वक फल, मिठाई व वस्त्र भेंट करें।

  5. गुरु मंत्र का जाप: इस दिन गुरु मंत्र या ‘ॐ गुरुवे नमः’ का कम से कम 108 बार जाप करें।

इस दिन किए जाने वाले खास दान और उपाय

ज्योतिष शास्त्र में गुरु पूर्णिमा का दिन बृहस्पति ग्रह (गुरु ग्रह) को मजबूत करने के लिए बेहद शुभ माना जाता है। इस दिन किए गए पुण्य कार्यों का अक्षय फल मिलता है:

  • अन्न व वस्त्र दान: जरूरतमंदों और विद्यार्थियों को धार्मिक पुस्तकें, कलम, पीले वस्त्र और अन्न का दान करें।

  • गौ सेवा: गौशाला में हरा चारा खिलाएं या गोसेवा हेतु दान करें।

  • विद्या दान: किसी गरीब बच्चे की शिक्षा में आर्थिक मदद करना गुरु पूर्णिमा पर सर्वोत्तम दान माना जाता है।

गुरु पूर्णिमा केवल एक धार्मिक कर्मकांड नहीं, बल्कि अपने शिक्षकों, माता-पिता और जीवन में सही रास्ता दिखाने वाले हर मार्गदर्शक के प्रति आभार प्रकट करने का पावन अवसर है।

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