Ranchi: झारखंड में JSSC-CGL समेत भर्ती परीक्षाओं को लेकर जारी विवाद के बीच राज्यसभा सांसद परिमल नाथवानी ने मंगलवार को अपने फेसबुक अकाउंट पर पोस्ट साझा कर मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन और झारखंड सरकार के प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों को सुनने और स्वीकार करने के कदम की सराहना की। परिमल नाथवानी ने अपनी पोस्ट में कहा कि झारखंड में प्रदर्शन कर रहे छात्रों की शिकायतों का समाधान करना जरूरी है। हालांकि, उन्होंने इन मांगों को स्वीकार करने के व्यापक प्रभावों पर भी गंभीरता से विचार करने की जरूरत बताई।
पहले से नौकरी पा चुके अभ्यर्थियों के भविष्य पर भी विचार जरूरी
राज्यसभा सांसद ने कहा कि जिन अभ्यर्थियों को पहले ही नौकरी मिल चुकी है, उनके भविष्य और करियर को प्रभावित करने वाला कोई भी फैसला उन्हें कानूनी लड़ाई की ओर ले जा सकता है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में मामला लंबे समय तक अदालतों में चल सकता है। इससे सभी पक्षों के लिए असमंजस और परेशानी की स्थिति पैदा हो सकती है। नाथवानी ने कहा कि प्रदर्शनकारी छात्रों की शिकायतों का समाधान जरूरी है, लेकिन समाधान निकालते समय पहले से नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थियों के भविष्य और आजीविका को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
निष्पक्ष जांच का दिया सुझाव
परिमल नाथवानी ने पूरे मामले के निष्पक्ष और स्थायी समाधान के लिए सीबीआई जांच कराने अथवा एक उच्चस्तरीय समिति गठित करने का सुझाव दिया। उन्होंने कहा कि इस समिति में सभी प्रमुख राजनीतिक दलों के प्रतिनिधियों को शामिल किया जाना चाहिए। इसमें झामुमो, भाजपा, कांग्रेस और राजद के प्रतिनिधियों को शामिल किया जा सकता है।
सर्वदलीय समिति से समाधान निकालने की बात
राज्यसभा सांसद ने कहा कि समिति पूरे मामले का विस्तृत अध्ययन कर ऐसा समाधान निकाल सकती है, जिससे प्रदर्शनकारी छात्रों की चिंताओं का समाधान हो सके और पहले से नौकरी हासिल कर चुके अभ्यर्थियों की आजीविका भी प्रभावित न हो। उनके मुताबिक, मामले का ऐसा समाधान जरूरी है जो सभी संबंधित पक्षों के हितों को ध्यान में रखे और विवाद का स्थायी रास्ता निकाले।
फेसबुक पोस्ट के बाद फिर चर्चा में JSSC-CGL विवाद
परिमल नाथवानी की मंगलवार को फेसबुक पर साझा की गई पोस्ट के बाद JSSC-CGL विवाद के समाधान को लेकर निष्पक्ष जांच और सभी पक्षों के हितों को ध्यान में रखते हुए स्थायी समाधान की मांग फिर चर्चा में आ गई है। उन्होंने सरकार की ओर से प्रदर्शनकारी छात्रों की मांगों को सुनने और स्वीकार करने के कदम का स्वागत करते हुए मामले के व्यापक प्रभावों पर भी विचार करने की जरूरत बताई है।




