रांची: झारखंड में भर्ती परीक्षाओं में धांधली और छात्र आंदोलन को लेकर सियासत चरम पर पहुंच गई है। भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के प्रदेश अध्यक्ष आदित्य साहू ने सत्तारूढ़ झारखंड मुक्ति मोर्चा (झामुमो) और कांग्रेस गठबंधन पर तीखा हमला बोलते हुए आरोप लगाया है कि सरकार छात्रों के ज्वलंत मुद्दों से ध्यान भटकाने के लिए खान एवं खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन विधेयक (एमएमडीआर) के मुद्दे पर मनगढ़ंत राजनीति कर रही है।
आदित्य साहू ने मंगलवार को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि एमएमडीआर अधिनियम पूरी तरह से राज्य के हित में है। इस नए कानून के लागू होने से सत्ता पक्ष से जुड़े लोगों की खनिजों के जरिए होने वाली काली कमाई पर पूरी तरह रोक लग जाएगी, और इसी छटपटाहट में वे जनता को गुमराह करने में जुटे हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि झामुमो और कांग्रेस का यह विरोध खनिज संपदाओं या राज्य के हितों की रक्षा के लिए नहीं है, बल्कि नियुक्ति परीक्षाओं में हुए घोटालों के असली मास्टरमाइंड और ‘बड़ी मछलियों’ को बचाने का एक राजनीतिक प्रयास है।
JPSC अध्यक्ष पद की 70 करोड़ में बोली लगने का गंभीर आरोप
भाजपा प्रदेश अध्यक्ष ने राज्य की भर्ती प्रणाली पर बेहद संगीन आरोप लगाते हुए कहा कि जेपीएससी (JPSC) के अध्यक्ष पद तक की बोली 70 करोड़ रुपये में लगाई जा रही है। उन्होंने सवाल उठाया कि इतनी बड़ी रकम का लेन-देन और इतनी बड़ी डील किसी जिला या राज्य स्तर के निचले नेता के बस की बात नहीं है। इसमें सत्ता के शीर्ष पर बैठे लोग शामिल हैं और यही कारण है कि निष्पक्ष जांच के नाम पर राज्य सरकार की सांसें अटकी हुई हैं।
CID जांच महज दिखावा, CBI जांच की मांग पर अड़ी भाजपा
सरकार द्वारा कराई जा रही CID जांच की मंशा पर सवाल उठाते हुए आदित्य साहू ने कहा कि यह कार्रवाई केवल अखबारों की सुर्खियां बटोरने और छात्रों में भ्रम फैलाने तक सीमित रह गई है। जांच एजेंसियां केवल छोटी-मोटी जानकारियां लीक कर माहौल बना रही हैं, लेकिन असल गुनहगारों और ‘बड़ी मछली’ की गिरेबान तक सीआईडी के हाथ नहीं पहुंच रहे हैं।
उन्होंने मांग की कि जब तक भर्ती परीक्षाओं में धांधली की CBI जांच की मांग पूरी नहीं होती और समयबद्ध पारदर्शी व्यवस्था लागू नहीं की जाती, तब तक युवाओं का यह आंदोलन रुकने वाला नहीं है। भाजपा छात्रों के साथ सड़क से लेकर सदन तक खड़ी है और इस लड़ाई को अंतिम अंजाम तक पहुंचाकर ही दम लेगी।





