जमशेदपुर: जमशेदपुर पश्चिम के विधायक सरयू राय ने कहा कि संस्कृत केवल एक प्राचीन भाषा नहीं, बल्कि जीवन को सही दिशा देने वाली ज्ञान परंपरा है। संस्कृत की सूक्तियों में जीवन और व्यवहार से जुड़े महत्वपूर्ण संदेश छिपे हैं। नई पीढ़ी इन सूक्तियों को समझकर अपने जीवन में अपनाए तो उसका भविष्य बेहतर हो सकता है।
रविवार को पीपुल्स एकेडमी के कालिदास सभागार में पाणिनि प्रज्ञा परिषद के तत्वावधान में आचार्य बालमुकुंद चौधरी की पुस्तक ‘सुभाषित संग्रहावली’ का लोकार्पण किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में सरयू राय मौजूद रहे।
सरयू राय ने बताया कि इस पुस्तक में करीब 37 ग्रंथों से चुनी गई संस्कृत सूक्तियों को शामिल किया गया है। इन सूक्तियों का हिंदी और अंग्रेजी में अनुवाद भी किया गया है, जिससे पाठकों को उनके अर्थ और संदेश को समझने में आसानी होगी।
उन्होंने कहा कि इस पुस्तक को केवल पढ़कर जानकारी हासिल करना ही पर्याप्त नहीं है। इसमें दिए गए विचारों को अपने व्यवहार और जीवन में उतारने का प्रयास करना चाहिए। उन्होंने युवाओं से संस्कृत साहित्य से जुड़ने की अपील की।
सरयू राय ने यह भी कहा कि संस्कृत भारती के आग्रह पर श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर परिसर में निर्माणाधीन भवन में संस्कृत के प्रचार-प्रसार के लिए स्थान उपलब्ध कराया जाएगा।
कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहीं डॉ. रागिनी भूषण ने कहा कि संस्कृत की सूक्तियां समाज के कल्याण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती हैं। उन्होंने कहा कि संस्कृत को कठिन भाषा मानना सही नहीं है। रोजमर्रा की भाषा में भी संस्कृत के कई शब्दों का इस्तेमाल होता है।
पुस्तक के लेखक आचार्य बालमुकुंद चौधरी ने सभी अतिथियों का आभार जताया और उन्हें प्रतीक चिह्न देकर सम्मानित किया। इस दौरान पाणिनि प्रज्ञा परिषद की ओर से आयोजित संस्कृत श्लोक और संभाषण प्रतियोगिताओं के विजेताओं को भी सम्मानित किया गया।
कार्यक्रम में शिक्षक, विद्यार्थी और शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जुड़े लोग मौजूद रहे।




