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जानिए कौन हैं जमाल सिद्दीकी? जिन्होंने RSS संस्थापक को भारत रत्न देने की मांग की?

India News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को भारत रत्न देने की मांग ने राजनीति में नई हलचल मचा दी है। यह मांग बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे पत्र में की

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India News: राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के संस्थापक डॉ. केशव बलिराम हेडगेवार को भारत रत्न देने की मांग ने राजनीति में नई हलचल मचा दी है। यह मांग बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जमाल सिद्दीकी ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु को लिखे पत्र में की है।
जमाल सिद्दीकी ने अपने पत्र में लिखा कि हेडगेवार केवल स्वतंत्रता सेनानी ही नहीं रहे, बल्कि वे राष्ट्रवाद के प्रणेता और संगठन निर्माण की अनूठी क्षमता वाले नेता थे। उनके विचार आज भी करोड़ों लोगों को प्रेरणा देते हैं। सिद्दीकी ने कहा कि स्वतंत्रता संग्राम में उनकी सक्रिय भूमिका और समाज को संगठित करने की उनकी क्षमता को देखते हुए उन्हें मरणोपरांत भारत रत्न मिलना चाहिए।

कौन हैं जमाल सिद्दीकी?

जमाल सिद्दीकी बीजेपी के प्रमुख मुस्लिम चेहरों में गिने जाते हैं। फिलहाल वे पार्टी के अल्पसंख्यक मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष हैं। इससे पहले वे महाराष्ट्र बीजेपी अल्पसंख्यक मोर्चा अध्यक्ष, पार्टी की चुनाव समिति के सदस्य और महाराष्ट्र हज समिति के अध्यक्ष रह चुके हैं।

उनका जन्म 1 जनवरी 1972 को उत्तर प्रदेश के बलरामपुर जिले में हुआ। उनके पिता अनवारुल हक़ सिद्दीकी एक स्कूल के प्रिंसिपल थे। शुरुआती शिक्षा उन्होंने गांव के मदरसे से उर्दू माध्यम में पूरी की। 1988 में गोंडा के किंग जॉर्ज कॉलेज से इंटरमीडिएट और 1994 में नागपुर के कर्मवीर दादासाहेब कन्नमवार इंजीनियरिंग कॉलेज से सिविल इंजीनियरिंग की डिग्री हासिल की। राजनीति में आने से पहले वे ठेकेदारी का काम करते थे। 2007 में उन्होंने राजनीति में कदम रखा और समाजवादी पार्टी के साथ शुरुआत कर उसी साल बीजेपी में शामिल हो गए।

विवादों से रहा नाता

जमाल सिद्दीकी कई बार अपने विवादित बयानों के कारण सुर्खियों में आए। उन्होंने पीएम मोदी को इंडिया गेट का नाम बदलकर भारत माता द्वार करने की सिफारिश की थी। मई 2025 में उन्होंने कहा था कि “जो मुसलमान राम और कृष्ण को नहीं मानते, उन्हें मुसलमान नहीं कहा जा सकता।” इस बयान से राष्ट्रीय स्तर पर बहस छिड़ गई थी और विपक्ष ने उन्हें घेरा था।

RSS संस्थापक को भारत रत्न देने की उनकी ताजा अपील अब राजनीतिक हलकों में नई बहस का मुद्दा बन चुकी है।

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