Bishkek, Kyrgyzstan: मध्य एशिया के देश किर्गिस्तान की बर्फीली वादियों और ऊंची पहाड़ियों के बीच कुदरत का एक ऐसा अनूठा अजूबा मौजूद है, जो दुनिया भर के वैज्ञानिकों और पर्यावरणविदों को हैरत में डालता है। हम बात कर रहे हैं ‘इसिक-कुल’ (Issyk-Kul) झील की, जिसकी एक विहंगम और मनमोहक तस्वीर अंतरराष्ट्रीय अंतरिक्ष स्टेशन (ISS) से सामने आई है। इस झील की सबसे बड़ी खासियत यह है कि इसमें 118 से अधिक नदियां और जलधाराएं आकर विलीन हो जाती हैं, लेकिन इस विशाल जलराशि से एक भी नदी या नाला बाहर नहीं निकलता।
माइनस तापमान में भी नहीं जमता पानी
समुद्र तल से करीब 1,607 मीटर की ऊंचाई पर स्थित इसिक-कुल झील चारों तरफ से तियान शान पर्वत श्रृंखला की बर्फ से ढकी चोटियों से घिरी हुई है। सर्दियों के मौसम में यहाँ का तापमान शून्य से कई डिग्री नीचे चला जाता है, फिर भी यह विशाल झील कभी पूरी तरह बर्फ में तब्दील नहीं होती। इसी विलक्षण गुण के कारण स्थानीय भाषा में इसे ‘गर्म झील’ (Warm Lake) कहा जाता है। भूवैज्ञानिकों के अनुसार, झील की अत्यधिक गहराई, विशाल जल-भंडार और इसका हल्का खारापन पानी में तापमान को लंबे समय तक रोके रखता है, जिससे सतह पर बर्फ की चादर नहीं जम पाती।
118 नदियां आकर मिलती हैं, फिर कहां जाता है पानी?
झील का जल-तंत्र दुनिया की सबसे दिलचस्प एंडोरहिक बेसिन (Endorheic Basin – बंद जल प्रणाली) में गिना जाता है। ग्लेशियरों और पिघलती बर्फ से निकलने वाली 118 से ज्यादा नदियां लगातार इसमें ताजा पानी लाती हैं। चूँकि इस झील से बाहर निकलने का कोई प्राकृतिक मुहाना नहीं है, इसलिए इसका पानी किसी भी सागर या महासागर तक नहीं पहुंचता। वैज्ञानिकों के अनुसार, यहाँ आने वाला सारा अतिरिक्त जल तीव्र धूप और शुष्क हवाओं के कारण धीरे-धीरे वाष्पीकृत (Evaporate) होकर सीधे वायुमंडल में समा जाता है।
अंतरिक्ष से नीले रत्न जैसी चमक
लगभग 182 किलोमीटर लंबी और 60 किलोमीटर चौड़ी यह झील किर्गिस्तान की सबसे बड़ी और दुनिया की दूसरी सबसे बड़ी अल्पाइन (पर्वतीय) झील है। अंतरिक्ष से ली गई तस्वीरों में बर्फीले सफेद पहाड़ों के बीच यह किसी चमकीले नीले रत्न (Blue Gem) की तरह दिखाई देती है। वैश्विक जलवायु परिवर्तन, ग्लेशियरों के पिघलने और वर्षा चक्र के बदलते पैटर्न को समझने के लिए वैश्विक शोधकर्ताओं के लिए यह झील एक अहम प्राकृतिक प्रयोगशाला बनी हुई है।





